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डॉ. रमेश चंद्र महरोत्रा देश के ख्‍याति प्राप्‍त भाषाविद रह चुके हैं। उनके निर्देशन में पॉंच डी.लिट एवं करीब साठ पी-एच.डी हो चुकी हैं। छत्‍तीसगढ़ी भाषा के विकास के लिए उन्‍होंने अपना अमूल्‍य योगदान दिया। उनका मानना है कि 'लवशाला' को आप प्रतिदिन 'हनुमान चालिसा'की तरह सुनें, जिससे पति-पत्‍नी के बीच सामंजस्‍य बना रहे।

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  1. लवशाला के लेखक ने रचा ऐसा अद्भुत साहित्य याद करेगा यह जग उनको जब तक है अस्तित्व I

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  2. लवशाला....अद्भुत और सामायिक आज की पीढ़ी के लिए प्रेरक और पुरानी पीढ़ी के लिए यादों के खूबसूरत दरीचे .....मैं तो लवशाला का आजीवन छात्र बना रहूंगा....

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  3. लवशाला....अद्भुत और सामायिक आज की पीढ़ी के लिए प्रेरक और पुरानी पीढ़ी के लिए यादों के खूबसूरत दरीचे .....मैं तो लवशाला का आजीवन छात्र बना रहूंगा....

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