सोमवार, 13 जनवरी 2014

तुरूप का पत्‍ता हे प्रियंका गांधी



आज जागरण के राष्‍ट्रीय संस्‍करण में प्रकाशित मेरा आलेख


कांग्रेस के लिए तुरूप का पत्ता है प्रियंका!
डॉ. महेश परिमल
भाजपा को अब संभल जाना चाहिए। चार राज्यों की जीत ने उसे भले ही थोड़ा बेपरवाह बना दिया हो। पर सच यह है कि अब उसके सामने न केवल ‘आप’, बल्कि प्रियंका गांधी भी है।  ‘आप’ को कम न आंकने की समझाइश संघ ने भी भाजपा को दी है। सर्वेक्षण बताते हैं कि मोदी का जादू अब उतर रहा है। क्योंकि अरविंद केजरीवाल अपने वादे और अपनी सादगी को लेकर काफी चर्चित हैं। लोग उनसे ईमानदाराना राजनीति की अपेक्षा कर रहे हैं। सच भी है अब परंपरागत पार्टियों से लोगों का मोहभंग होने लगा है। घिसे-पिटे नेताओं के बेतुके बयान सुन-सुनकर भी लोग अब बुरी तरह से बोर होने लगे हैं। ऐसे में कांग्रेस यदि प्रियंका को सामने लाती है, तो वह भाजपा के लिए भारी मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। प्रियंका राहुल से अधिक लोकप्रिय है।  उत्तरा प्रदेश विधानसभा चुनाव में लोगों ने उन्हें प्रचार करते देखा था। लोगों को उसमें इंदिरा गांधी की छवि दिखाई देती है। उनकी मुस्कराहट, बाडी लैग्वेज, हेयर स्टाइल सभी कुछ इंदिरा जी जैसा है। यही छवि भाजपा के लिए भारी पड़ सकती है। राहुल के बाद अब कांग्रेस के पास प्रियंका के रूप में यही तुरूप का पत्ता बचा है। इसे भुनाने का सही समय भी आ गया है।
प्रियंका ने जैसे ही राहुल गांधी के लिए कांग्रेस नेताओं की बैठक में भाग लिया, वैसे ही मीडिया मानो जाग गया। चारो तरफ से प्रियंका की ही चर्चा होने लगी। प्रियंका की सक्रियता को लोग नरेंद्र मोदी के प्रभाव को रोकने से जोड़ने लगे हैं। कोंग्रेस की मुख्य चिंता उत्तर प्रदेश है। वहां वह 20 से अधिक प्राप्त करना चाहती है। ताकि सपा-बसपा को सबक सिखाया जा सके। दूसरी ओर कांग्रेस को एक ऐसे चेहरे की आवश्यकता है, जो नरेंद्र मोदी को चुनौती दे सके। अभी तक कांग्रेस के पास ऐसा कोई जादुई चेहरा नहीं है, जो ऐसा कर सके। इसलिए सबकी नजरें प्रियंका पर जाकर टिक गई हैं। वैसे गांधी परिवार में यदि राहुल और प्रियंका की तुलना की जाए, तो प्रियंका को राहुल से अधिक अंक मिलते हैं। प्रियंका प्रतिभावान है, इसमें कोई शक नहीं। पर आज जो कांग्रेस की हालत है, उसे ठीक करने के लिए गांधी परिवार से हटकर कुछ ऐसा करना ही पड़ेगा, जिससे पूरी कांग्रेस बेदाग छवि के साथ लोगों के सामने आए। इसके लिए प्रियंका को काफी परिश्रम करना पड़ेगा। कांग्रेस में अभी भी ऐसे लोग हैं, जो सत्ता प्राप्त करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। आज केवल राहुल ही नहीं, बल्कि स्वयं सोनिया और अब प्रियंका भी ऐसे चापलूसों से घिरे हुए हैं, जो परले दर्जे के स्वार्थी हैं। इन पार्टी की मजबूती से ज्यादा स्वयं की मजबूती की चिंता है। इसलिए येन केन प्रकारेण इस तरह के बयान आते रहते हैं कि गांधी परिवार के अलावा कोई भी कांग्रेस को जीवित नहीं रख सकता। देश का उद्धार गांधी परिवार से ही होना है। इस तरह की धारणा कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है।
चार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली पराजय से पार्टी पूरी तरह से सजग हो गई है। भाजपा ने नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाकर उसे पूरे देश में ही चर्चित कर दिया है। वे देश के कोने-कोने में जाकर गरज रहे हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाज इसी से लग जाता है कि राहुल गांधी की सभा में जितने लोग लाए जाते हैं, उससे कई गुना लोग नरेंद्र मोदेी की आम सभा में दिखाई देते हैं। कांग्रेस अब राहुल गांधी को आगे करने में घबरा रही है। वह चिदम्बरम, ए.के. एंटोनी, नंदन निलकेणी जैसों के नाम को आगे बढ़ा रही है। वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कह दिया है कि वे अब किसी भी तरह से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं होना चाहते। इससे उपरोक्त नामों को बल मिला है। इसमें अब प्रियंका का नाम जुड़ जाने से देश की राजनीति में एक उबाल सा आ गया है। भले ही प्रियंका में लोग इंदिरा गांधी की छवि देख रहे हो, पर इंदिरा गांधी जैसा दिखना और इंदिरा गांधी जैसा होना दोनों ही अलग बात है। यह बात अलग है कि जो प्रियंका को जानते हैं, उनका मानना है कि वे इंदिरा जी जैसी ही सख्त और दृढ़ हैं। वे अपने लुक के लिए विशेष रूप से सजग हैं। भारतीयों को तो वे स्ट्रांग और इम्प्रेसिव दिखाई देती हैं। उनके सामने राहुल नेचरल हैं। राहुल अपने दिखावे को लेकर प्रियंका जितना सजग नहीं हैं। राहुल शायद अपने काम से अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। गुनाहगार राजनेताओं को बचाने और आदर्श घोटाले में मंत्रियों को बचाने के मामले को लेकर उन्होंने अपनी दृढ़ता का परिचय दिया ही है। दिल्ली में आप को बिना किसी शर्त के समर्थन देने में राहुल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसा माना जा रहा है।
आज जमाना मार्केटिंग का है। कांग्रेस ने राहुल की छबि को सुधारने के लिए जापान की एक कंपनी को 500 करोड़ का ठेका दिया है। कांग्रेस के कई हितकारी कामों को मीडिया में उतना स्थान नहीं मिला, जितना घोटालों को। इसलिए कांग्रेस ने जो हितकारी काम किए हैं, उसे सिलसिलेवार बताना जनता तक पहुंचाना आवश्यक है। अनाज योजना और सबसिडी की राशि डायरेक्ट उपभोक्ता के बैंक खाते में जमा करने की योजना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह योजना प्रचार-प्रसार के अभाव में चर्चित नहीं हो पाई। अब राहुल, प्रियंका और जापानी कंपनी पर ही यह दारोमदार है कि वह मैदान में आकर कांग्रेस की इन उपलब्धियों को जनता के सामने लाए। 17 जनवरी को दिल्ली में अ.भा. कांग्रेस कमेटी की बैठक है, इस पर सभी की नजरें हैं। इसी बैठक में प्रधानमंत्री पद के लिए नाम की घोषणा की संभावना है। वैसे कुछ नेता मानते हैं कि चुनाव के पहले प्रधानमंत्री का नाम घोषित करना उचित नहीं है। प्रियंका को राजनीति का उतना अनुभव नहीं है, जितना राहुल को है। राहुल पार्टी में सक्रिय हैं, पर प्रियंका नहीं है। यदि बैठक में प्रियंका का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आता है, तो यह भाजपा के लिए बहुत ही मुश्किल होगा। अब देखना यह है कि कांग्रेस प्रियंका नाम का यह तुरूप का पत्ता कब चलती है।
  डॉ. महेश परिमल

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