शुक्रवार, 9 मई 2008

युवतियों में फैशन का रूप लेती धूम्रपान की आदत


डॉ. महेश परिमल
भारत के महानगरों की युवतियाँ आज पूरी तरह से पश्चिमी सभ्यता के रंग में रँगी हुई हैं। कॉल सेंटर की बात करें या देर रात तक चलती पार्टियों की, हर कहीं पश्चिमी रंग बिखरा हुआ है। फैशन और आधुनिकता को अपनाती युवतियों के मुँह से धुएँ के छल्ले निकलना आम बात हो गई है। जो लोग पहली बार ये दृश्य देखते हैं, उनके मुँह आश्चर्य से खुले रह जाते हैं, किंतु रोज देखने वालों के लिए ये कोई नई बात नहीं है। बड़ी-बड़ी कंपनियों में ऊँचे पद पर काम करने वाली युवतियों में सिगरेट पीना अब एक सामान्य बात हो गई है। ये युवतियाँ अपना स्टेटस दिखाने के लिए क्लबों-पार्टियों और कॉल सेंटरों में धुएँ के छल्ले उड़ाते हुए देखी जा सकती हैं। ये आज की आधुनिक युवतियों की लाइफ स्टाइल है। जो युवती इस स्टाइल को स्वीकार नहीं करती, नि:संदेह वे आधुनिकता की दौड़ में पिछड़ जाती हैं।
यूँ तो भारत के गाँवों में बसने वाली कुछ जातियों की महिलाओं में बीड़ी पीने या तम्बाखू खाने की आदत बहुत पुरानी है। पुरुषों के ही समान अधिक शारीरिक मेहनत करने के कारण ये महिलाएँ अपनी थकान मिटाने के लिए काम के बीच दो-चार मिनट का आराम करते हुए बीड़ी का एक कश खींच लेती हैं या तम्बाखू खा लेती है। जिससे थकान भी मिट जाती है और साथ ही भूख भी दब जाती है। उन गरीब स्त्रियों के लिए बीड़ी या तम्बाखू को अपनाना एक विवशता है, किंतु आज की आधुनिक युवतियों के लिए तो सिगरेट या शराब का सेवन स्टेटस सिंबल है। पश्चिमी सभ्यता को अपनाते हुए महानगर की युवतियाँ आज तेजी से धूम्रपान की गलत आदत का शिकार हो रही हैं। एक शोध के अनुसार विश्वभर में तम्बाखू का सबसे अधिक उपयोग करने वाले देशों में भारत का स्थान तीसरा है। पूरे विश्व में तम्बाखू के सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख लोग मौत के शिकार होते है, जिसमें से 8 से 9 लाख भारतीय होते हैं। भारत में तम्बाखू का सेवन करनेवाली स्त्रियों की संख्या 70 प्रतिशत है। इस ऑंकड़े में निरंतर होती वृद्धि अवश्य चिंता का विषय है।

ऐसा नहीं है कि हमारे देश की ये आधुनिक युवतियाँ जो कि इस बुरी आदत का शिकार हो रही हैं, ये पढ़ी-लिखी नहीं है। शिक्षित होने के कारण इस आदत से होने वाले नुकसान को जानते हुए भी ये इसे छोड़ने में स्वयं को असमर्थ पाती हैं। केरियर के क्षेत्र में पुरुषों से प्रतिस्पर्धा की दौड़ में ये युवतियाँ सफलता के दोनों किनारे छू लेना चाहती हैं। ऑफिस में काम का दबाव और घर में गृहस्थी की जवाबदारी। दो पाटों के बीच पीसती आज की आधुनिकाएँ सिगरेट के एक कश में पल भर का सुकून महसूस करती हैं। कभी-कभी तो देर रात तक चलती पार्टियों में केवल फैशन के कारण या फिर एक-दूसरे को देखते हुए ही धूम्रपान किया जाता है। पल भर के आनंद के लिए खींचा गया सिगरेट का एक कश धीरे-धीरे आदत में शामिल हो जाता है।
फिल्मी जगत की अभिनेत्रियाँ आज की युवतियाें का आदर्श हैं। वे उनके पहनावे से लेकर चलने-फिरने, बोलने, सोचने-विचारने आदि सभी बातों को अपने जीवन में अपनाती हैं। फिर भला उनके मुँह से उड़ते छल्लों को वे अनदेखा कैसे कर सकती हैं? जब पार्टियों में मौज-मस्ती के दौर में दोस्तों के द्वारा सिगरेट का एक कश खींचने का आग्रह किया जाता है, तो केवल 'ट्राय' करने के लिए ये सिगरेट को होठों से लगा लेती हैं और धीरे-धीरे इसका नशा ऐसा छा जात है कि बार-बार सिगरेट पीने की तलब लगती है। ये तलब मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कमजोर बनाती है।
वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार धुम्रपान या अन्य किसी भी तरह से तम्बाखू सेवन करने वाले 71 प्रतिशत लोगों में से मात्र 2 या 3 प्रतिशत लोग ही इस बुरी आदत से छुटकारा पाने में सफल हो पाते हैं। वैसे भी पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को इस बुरी आदत से छुटकारा दिलवाना बहुत ही मुश्किल का काम है। समस्या गंभीर इसलिए भी है, क्योंकि माता के द्वारा ये बुरी आदत संतान में भी सहज रूप से आती है। घर में यदि पुरुष इस बुरी आदत का शिकार होता है, तो स्त्री द्वारा इसकी बुराई को समझाते हुए बच्चों को इससे दूर रखा जा सकता है, किंतु जब घर की स्त्री ही इस बुरी आदत से लिप्त हो जाती है, तो बच्चों को समझाने का एकमात्र द्वार ही बंद हो जाता है।

गर्भवती स्त्रियों के द्वारा तम्बाखू या सिगरेट का सेवन करने से इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ना स्वाभाविक है। इसके कारण गर्भपात, अविकसित संतान का जन्म, मानसिक या शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे का जन्म आदि केस देखने को मिलते हैं। एक शोध के अनुसार एक सिगरेट में 'फिनॉल', 'लिड', 'टार' और 'केडियम' जैसे 4,800 जितने खतरनाक केमिकल होते हैं और उसके धुएँ में 4,000 जितने केमिकल और लगभग 500 जितनी जहरीली गैस होती है। इसी कारण सिगरेट, पीने वाले से कहीं अधिक सामने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुँचाती है। सिगरेट से होने वाले सभी नुकसान को जानते हुए भी इसका व्यसन छोड़ने के बाद भी व्यक्ति फिर से इसके जाल में फँस जाता है।
डॉ. महेश परिमल

7 टिप्‍पणियां:

  1. YEH LEKH MUJHEY BAHUT ACCHA LAGA....KUCH SAAL MAINE BHI SMOKING KE HAI....APNEY JISE TARAH SEY SMIKING KE NUKSAAN BATAYE HAI SAHI HAI...PAR YEH BAAT UTNI HE PURSHO PAR BHI LAGU KYUN NAHI HOTI YEH BAAT MERI SAMJH SEY BAHAR HAI....

    KARNEY DEY SMOKING KYA FARK PADTA HAI.....MUJHEY AAJ BHI TENSHION JAB HOTI HAI SMOKING SEY RELAAXED FEEL HOTA HAI.......

    RAHI BAAT BACCHO KE BIGADNEY KE TO MUJHEY YEH AADAT APNEY PITA SEY HE MILE KISI AURAT SEY NAHI....

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  2. "घर में यदि पुरुष इस बुरी आदत का शिकार होता है, तो स्त्री द्वारा इसकी बुराई को समझाते हुए बच्चों को इससे दूर रखा जा सकता है, किंतु जब घर की स्त्री ही इस बुरी आदत से लिप्त हो जाती है, तो बच्चों को समझाने का एकमात्र द्वार ही बंद हो जाता है।"

    क्या मोरल कि जिम्मेदारी सिर्फ महिला कि हैं ??
    "गर्भवती स्त्रियों के द्वारा तम्बाखू या सिगरेट का सेवन करने से इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ना स्वाभाविक है। "
    रिसर्च कहती हैं गर्भ मे शिशु पर सिगरेट के धूये का असर होता हैं और बहुत से पिता धुम्रपान करते हैं ?? उनको क्यो कोई राय नहीं डॉ साहेब ।
    "ऐसा नहीं है कि हमारे देश की ये आधुनिक युवतियाँ जो कि इस बुरी आदत का शिकार हो रही हैं, ये पढ़ी-लिखी नहीं है। शिक्षित होने के कारण इस आदत से होने वाले नुकसान को जानते हुए भी ये इसे छोड़ने में स्वयं को असमर्थ पाती हैं। केरियर के क्षेत्र में पुरुषों से प्रतिस्पर्धा की दौड़ में ये युवतियाँ सफलता के दोनों किनारे छू लेना चाहती हैं। ऑफिस में काम का दबाव और घर में गृहस्थी की जवाबदारी। दो पाटों के बीच पीसती आज की आधुनिकाएँ सिगरेट के एक कश में पल भर का सुकून महसूस करती हैं। "
    स्त्रियों की केरियर सम्बन्धी महत्वकान्क्षा को प्रतिस्पर्धा मानना है सब प्रोब्लेम्स कि जड़ हैं । स्त्री करे तो प्रतिस्पर्धा पुरूष करे तो केरियर का दबाव । जब तक ये सोच रहेगी , लड़किया उन सब बेडियों को तोड़ना चाहेगी जो समाज नए उन पर लगाई हैं ??
    अगर सिगरेट बुरी हैं तो सामाजिक बुराई हैं बंद करवा दीजिये , दण्डित करिये लड़को को जब वो सिगरेट पी कर घर आए , तब ये मत कहे "बेटा बड़ा हो रहा हैं " । समाज पुरुषो कि व्यसन कि आदत को दंड दे कोई लड़की फिर उस व्यसन को नहीं अपनायेगी ।
    बुराई सिगरेट , शराब मे हैं फिर चाहे महिला ले या पुरूष ।

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  3. बहन जी जिन्दाबाद!

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  4. भले ही मुझे नारी को बराबरी का हक देने का विरोधी मान लिया जाए। लेकिन, लड़कियों के होठों में फंसी सिगरेट या हाथों में शराब मेरा तो खून जलाता है।
    और, महेशजी गर्भवती स्त्रियों की बात छोड़िए ना। आसपास के धुएं से तो, सिगरेट न पीने वाले हर की हालत बुरी है। मेरी भी

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  5. लड़कियां हों या लड़के,आदत दोनों के लिए बुरी है,बड़ी गंभीर समस्या है जो पूरी तरह पश्चिम से हमारे यहाँ आई है.

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  6. आपकी टिप्पणियों के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद.

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  7. Harshvardhan ji khoon mat jalaiye.mehangaai ka jamana hai ,badi mushkil se thoda sa khoon bachta hai.Jalana hi hai to cigerate banane waali factory ko jalaiye.na ladakiyon piyengi na ladke.problem hi khatm.:)

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