बुधवार, 21 जनवरी 2009

इंटरनेट से दूर भागते आज के राजनेता


डॉ. महेश परिमल
ऒबामा की ताजपॊशी हॊ गई। आप जानते हैं चुनाव के समय उन्हॊंने किस तरह से लॊगॊं कॊ रिझाने के लिए कंप्यूटर का इस्तेमाल किया। वे इसे अच्छी तरह जानते हैं कि कंप्यूटर के माध्यम से वे किस तरह लॊगॊं के बीच पहुँच सकते हैं। हमारे देश के नेता कंप्यूटर पर गेम खेलते हैं या अपना मेल चेक करते हैं। इससे अधिक उन्हें कुछ नहीं आता। सरकार की तरफ से मिले लेपटॉप का उपयॊग तॊ उनका निजी सचिव या फिर उनके नाती पॊते करते हैं। क्या यह अच्छी बात है। हमारे देश में हाल ही में कई रायों के विधानसभा चुनाव हुए। सरकारें बनने लगीं। यदि हम जीते हुए प्रत्याशियों पर एक नजर डालेंगे, तो पाएँगे कि इसमें से बहुत ही कम ऐसे होंगे, जो आधुनिक तकनीक को समझते होंगे। ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने भाषण में आधुनिक टेक्नालॉजी को अपनाने पर जोर दिया होगा। वास्तव में देखा जाए, तो ये लोग जो कहते हैं, उससे ही दूर रहते हैं। हाल में अमेरिका में जो राष्ट्रपति चुनाव हुआ, उसमें इंटरनेट संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस बात को स्वयं बराक हुसैन ओबामा भी मानते हैं। ओबामा अपने ब्लॉग पर लाइव डिस्कशन करते थे, वे जीत जाएँ, इसके लिए उनके ब्लॉगर साथियों ने बहुत परिश्रम किया।
आज के नेता इंटरनेट का कितना उपयोग करते हैं, यह तो उनके परिवार वालों से जाना जा सकता है। इन्हें मिले सरकारी लेपटॉप का इनसे अधिक इनके परिवार के बच्चे करते पाए गए हैं। ये नेता तो अधिक से अधिक अपने ई-मेल चेक करने तक ही सीमित रहते हैं। राजीव गांधी ही पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्हें आधुनिक तकनालॉजी की जानकारी थी। आज जो हम हर तीसरे व्यक्ति के हाथ में मोबाइल देख रहे हैं, गाँव-गाँव और गली-गली में पीसीओ देख रहे हैं, इसके पीछे राजीव गांधी का ही हाथ है। उन्होंने अपने साथी सैम पित्रोडा के माध्यम से इस टेक्नालॉजी को आगे बढ़ाया। टेक्नालॉजी तो अनेक प्रकार ही होती है, पर भारत की मध्यमवर्ग की प्रजा के लिए वह कितनी उपयोगी साबित होती है, यह महत्वपूर्ण है। इसके लिए राजीव गांधी ने कई रास्ते खोज निकाले, जिनका आज खुलकर प्रयोग हो रहा है।
सैम पित्रोडा ने टेली कम्युनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति का सूत्रपात किया। राजीव गांधी के इस वफादार साथी ने उस समय टेक्नालॉजी जो की फसल बोई थी, आज हम सब उसी लाभ उठा रहे हैं। आज के युवा राजनेता इंटरनेट को समझने की कोशिश कर रहे हैं। कई तो इसमें पारंगत भी हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर के नेशनल कांफ्रेंस के सुप्रीमो फारुक अब्दुल्ला के पुत्र और सांसद उमर अब्दुल्ला तो इसमें मास्टर हैं। उमर की जिनके साथ शादी हुई है, वह सचिन पायलट की बहन है, वह कंप्यूटर इंजीनियर है। अब कई राजनेता इस दिशा में रुचि ले रहे हैं। कइयों ने तो अपना बायोडाटा भी इंटरनेट पर डाल रखा है।
दिल्ली के एक इंटरनेट कनेक्शन प्रोवाइडर को आज के नेताओं को इंटरनेट के उपयोग के बारे में जानकारी देने का काम मिला। विश्व में ई-लर्न्ािंग किस तरह से चल रही है, उसकी पूरे एक घंटे तक जानकारी उन्होंने नेताओं को दी। उसने अपना अनुभव बाँटते हुए बताया कि इंटरनेट के बारे में इन नेताओं को कुछ बताना यानी भैंस के आगे बिन बजाना ही है। इस दिशा में वे इतना ही कर सकते हैं कि मोबाइल पर घंटों बात कर सकते हैं। इसकी गंभीरता को समझे बिना ये अपनी वेबसाइट खोल लेते हैं, इससे अधिक हुआ तो अपने कार्ड में अपना ई-मेल पता और वेबसाइट का पता डलवा लेते हैं, ताकि अपने आप को आधुनिक बता सकें। इनका काम यहीं तक सीमित रहता है, इसलिए न तो इनकी वेबसाइट अपडेट होती है और न ही ये अपना ई-मेल चेक कर पाते हैं। कुछ दिनों बाद इनका मेल बॉक्स भर जाता है, इन्हें इसका पता भी नहीं चलता।
विश्व भर के राजनेता क्या कर रहे हैं, उनकी प्रगति किस तरह से हुई, उन्होंने क्या-क्या भूलें कीं, उन्होंने किस तरह से आगे बढ़ने के लिए छलांग लगाई, ऐसी ढेर सारी जानकारियाँ नेट पर उपलब्ध है। किंतु हमारे राजनेता इससे बिलकुल अनजान हैं। कहा जाता है कि जब बाबरी मस्जिद गिराई जा रही थी, तब तात्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव कंप्यूटर पर गेम खेल रहे थे, ऐसा उनके आलोचकों का कहना है। सच तो यह है कि उस समय वे कुछ ऐसी जानकारी सर्च कर रहे थे, जो देश के लिए उपयोगी थी। श्री राव कंप्यूटर का उपयोग करना अच्छी तरह से जानते थे। आधुनिक टेक्नालॉजी का उपयोग करने के लिए राजनीति के इन खिलाड़ियों के पास समय नहीं है। उनके हाथ-पाँव तो उनके सचिव होते हैं या फिर उनके समर्थक, जो यदि एक बार कंप्यूटर पर बैठ गए, तो अपना काम अधिक और नेता का काम कम करते हैं।
भारत की आधी आबादी जब 25 वर्ष के अंदर है, तब इंटरनेट का उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके बाद भी 90 प्रतिशत राजनेता ऐसे हैं, जिन्हें इंटरनेट की जरा भी जानकारी नहीं है। उन्हें ई-मेल की थोड़ी-बहुत जानकारी होती है, किंतु वेबसाइट, डोमाइननेम, अपलोड-डाउनलोड, सर्च इंजन के संबंध में कुछ भी समझ नहीं है। आश्चर्य इस बात का है कि इन नेताओं को सरकार की तरफ से मिलने वाले लेपटाप और ब्राडबेंड कनेक्शन का उपयोग उनका स्टाफ या उनके बच्चे ही अधिक करते हैं।
अब इन राजनेताओं को कौन समझाए कि आज इंटरनेट इंसान के लिए कितना आवश्यक हो गया है। जहाँ ये इंटरनेट से दूर भाग रहे हैं, वहीं अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच अमिताभ बच्चन रात के दो बजे तक इंटरनेट पर अपने विचार लिख रहे हैं, ये विचार लोगों तक पहँच रहे हैं और लोग इस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। ये चुनाव प्रचार का एक सशक्त माध्यम बन सकता है, इसकी समझ यदि आज के नेताओं को आ जाए, तो सचमुच देश के दिन फिर सकते हैं।
डॉ. महेश परिमल

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