बुधवार, 2 दिसंबर 2009

संघर्षमय रहा नेपाल से मुंबई तक का सफर- उदित नारायण


आकाशवाणी' नेपाल से अपने कैरियर की शुरुआत करके शोहरत की बुंलदियों तक पहुंचने वाले बालीवुड के प्रसिद्ध पाश्र्वगायक उदित नारायण आज भी अपने गानों से श्रोताओं के दिलों पर राज करते है । उदित नारायण झा का जन्म पेपाल में एक दिसंबर १९५५ को मध्यम वर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ । उन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बिहार के सहरसा से पूरी की और आगे की पढ़ाई नेपाल के काठमांडू शहर से पूरी की । बचपन के दिनों से ही उनका रूझान संगीत की ओर था और वह पाश्र्वगायक बनना चाहते थे। इस दिशा में शुरुआत करते हैं। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा पंडित दिनकर कैकिनी से हासिल की । उदित नारायण ने गायक के रूप में अपने करियर की शुरुआत नेपाल में आकाशवाणी से की 'जहां वह लोक संगीत का कार्यक्रम पेश किया करते थे । लगभग ८ वर्ष तक नेपाल के आकाशवाणी मंच से जुड़े रहने के बाद वह १९७८ में मुंबई चले गए और भारतीय विद्या मंदिर में स्कॉलरशिप हासिल कर शाीय संगीत की शिक्षा लेने लगे । वर्ष १९८० में उदित नारायण की मुलाकात मशहूर संगीतकार राजेश रौशन से हुई जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान करके अपनी फिल्म 'उन्नीस बीस 'में पाश्र्वगायक केरूप तके ें उन्हें काम करने का मौका दिया लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म टिकट खिड़की पर बुरी तरह नकार दी गई । पर'दिलचस्प बात है कि इस फिलम में उन्हें अपने आदर्श मोहम्मद रफी के साथ पाश्र्वगायन का मौका मिला । नारायण अब पांच बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके है । सबसे पहले उन्हे वर्ष १९८८ में फिल्म कयामत से कयामत तक के 'पापा कहते है बड़ा नाम करेगा 'गाने के लिए सर्वŸोष्ठ गायक का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया । इसके बाद १९९५ में फिल्म दिलवाले दुल्हनियां ले जाएगें के गीत 'मेंहदी लगा के रखना ' १९९६ में फिल्म राजा ङ्क्षहदुस्तानी के गीत 'परदेसी परदेसी जाना नहीं ' १९९९ में फिल्म हम दिल दे चुके सनम के गीत 'चांद छुपा बादल में 'और २००१ में फिल्म लगान के गीत 'सुन मितवा 'के लिए भी उन्हें सर्वŸोष्ठ पाश्र्वगायक का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया । हिन्दी सिनेमा जगत में उदित नारायण के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष २००९ में पदमश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया । वर्ष २००२ में फिल्म लगान के गीत 'सुन मितवा 'और २००३ में फिल्म 'ङ्क्षजदगी खूबसूरत 'है के गीत' छोटे छोटे सपने 'के लिए वह सर्वŸोष्ठ पाश्र्वगायक के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए । आमिर खान ,शाहरूख खान जैसे नामचीन नायकों की आवाज कहे जाने वाले उदित नारायण ने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे कैरियर में लगभग १५००० फिल्मी और गैर फिल्मी गाने गाए हैं। उन्होंनें हिन्दी के अलावा उर्दू, तमिल, बंगला, गुजराती, मराठी, ,तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ ् उडिया और नेपाली फिल्मों के गीतों के लिए भी अपना स्वर दिया है । उदित नारायण के सिने कैरियर पर निगाह डालने पर पता चलता है कि अभिनेता आमिर खान पर फिल्माए उनके गाए गीत काफी लोकप्रिय हुए हैं । वर्ष १९८८ में प्रदॢशत फिल्म कयामत से कयामत तक के गीत ' पापा कहते है बड़ा नाम करेगा और ऐ मेरे हम सफर 'गीत की कामयाबी के बाद उदित नारायण ने आमिर खान के लिए कई सुपरहिट गीत गाए 'जिनमें मुझे नींद न आए 'दिल 'पहला नशा पहला खुमार 'जो जीता वही सिकंदर 'राजा को रानी से प्यार हो गया 'अकेले हम अकेले तुम 'परदेसी परदेसी जाना नही 'राजा हिंदुस्तानी 'सुन मितवा 'लगान 'प्रमुख है ।
आमिर खान के अलावा बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले अभिनेता शाहरूख खान की फिल्मों के लिए भी उदित नारायण ने कई सुपरहिट गीत गाकर उनकी फिल्मों को सफल बनाया है। उन्होंने सबसे पहले लिए फिल्म 'डर 'में जादू तेरी नजर सुपरहिट गीत गाया था । इसके बाद उन्होंने 'मेंहदी लगा के रखना, रूक जा ओ दिल दीवाने 'दिल वाले दुल्हनियां ले जाएंगे 'दिल तो पागल है 'दिल तो पागल है ' ऐ अजनबी 'दिल से 'यूं ही चला चल 'स्वदेश 'जैसे सुपरहिट गाने गाए। उदित नारायण ने कई गैर फिल्मी गीतों के गायन से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है । उनके गाए प्राइवेट अलबम में कुछ है 'भजन संगम, भजन वाटिका, आई लव यू, दिल दीवाना, यह दोस्ती, लव इज लाइफ, झुमका दे झुमका, मा तारिणी, धुली गंगा प्रमुख है । बहुमुखी प्रतिभा के धनी उदित नारायण ने नेपाली फिल्मों में अभिनय भी किया है। इनमें कुसुमे रूमाल और पिराती प्रमुख है । इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी सुपरहिट हिट फिल्म 'कब होइ गवनवां हमार 'का निर्माण भी किया है। उदित नारायण भारत के अलावा अमरीका, कनाडा, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका में स्टेज कार्यक्रम पेश भी कर चुके हैं ।
प्रेम कुमार

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