मंगलवार, 30 मार्च 2010

विध्वंसक घटना से रुकी थी तारों के निर्माण की प्रक्रिया


एक नवनि‍र्मित आकाशगंगा में अरबों साल पहले किसी विध्वंसक घटना की वजह से तारों के निर्माण की प्रक्रिया रुक गई थी । ब्रिटेन में डरहम विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने एक नए शोध में इस घटना के सबूत मिलने के बाद विश्वास व्यक्त किया है कि इससे मालूम हो सकता है कि हमारी आकाशंगगा के समान अन्य विशाल मंदाकिनियों का उनके निर्माण के बाद विस्तार क्यों नहीं होता रहा। उसने आशा व्यक्त की है कि इस निष्कर्ष से आकाशगंगाओं के निर्माण और विकास के बारे में समझ और बढ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन अरब साल पहले एसएमएम जे १२३७ प्लस ६२क्३ नाम इस विशाल आकाशगंगा का निर्माण महाविस्फोट के बाद हुआ, उस समय ब्रrाण्ड की उम्र मौजूदा उम्र की एक चौथाई थी। निष्कर्षो के अनुसार इस आकाशगंगा में कई विस्फोट हुए, जो किसी परमाणु बम से होने वाले विस्फोट से खरबों गुना ज्यादा शक्तिशाली थे। इस तरह के विस्फोट लाखों साल तक हर सेकंड होते रहे, जिनसे निकली गैस से नए तारों का निर्माण हुआ। इस गैस के कारण ये तारे आकाशगंगा की गुरुत्व शक्ति से बाहर हो गए, जिससे प्रभावी रूप से इनका विकास नियंत्रित हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि आकाशगंगा के ब्लैक होल से उत्पन्न मलबे से बाहर निकले प्रवाह या समाप्त हो रहे तारों से उत्पन्न शक्तिशाली हवाओं से भारी मात्ना में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जिसे सुपरनोवा कहा जाता है।
रायल सोसाइटी और रायल एस्ट्रोनोमिकल की आíथक सहायता से किया गया यह शोध रायल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी के मासिक सूचनापत्न में प्रकाशित हुआ है। उर्सा मेजर तारामंडल के मार्गनिर्देशन में जेमिनी वेधशाला का इस्तेमाल करते हुए इस आकाशगंगा का निरीक्षण किया गया।

शोध दल के प्रमुख डा. डेव अलेक्जेंडर का कहना है-अतीत में देखने पर हमें एक विध्वसंक घटना का पता लगा है, जिसने तारों का निर्माण और स्थानीय ब्रrाण्ड में एक विशाल आकाशगंगा का विकास रोक दिया। यह आकाशगंगा नए तारों को बनने से रोककर अपने विकास को नियंत्नित कर रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस घटना के पीछे ऊर्जा का भारी उत्सर्जन है लेकिन इसका पता उन्हें अब लग पाया है।
उनका कहना है कि इसी तरह के भारी ऊर्जा उत्सर्जन ने तारों के निर्माण के लिए जरूरी पदार्थो को उड़ाकर संभवत: प्रारंभिक ब्रहृमांड में अन्य आकाशगंगाओं के विकास को रोक दिया। शोध दल अब यह पता लगाने के लिए तारों का निर्माण करने वाली अन्य विशाल आकाशगंगाओं का अध्ययन करने की योजना बना रहा है कि अन्य आकाशगंगाओं में भी इसी तरह की घटना तो नहीं हुई है।
अजय कुमार विश्वकर्मा

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