गुरुवार, 25 जून 2009

कैसे करें जीडी की तैयारी


ग्रुप डिस्कशन यानी जीडी दूसरे चरण की परीक्षा का महत्वपूर्ण अंग है। जो स्टूडेंटस अभी पढाई कर रहे हैं, उन्हें इसके लिए अपने विषय और समसामयिक विषयों की तैयारी पर फोकस करना चाहिए। चूंकि एक एमबीए से यह उम्मीद की जाती है कि वह अपनी लीडरशिप क्वालिटी और एक टीम के रूप में बेहतरीन नतीजा देगा और इसी क्वालिटी की जांच के लिए ही जीडी का आयोजन किया जाता है। इसके तहत किसी सिचुएशन पर आधारित कोई टॉपिक देकर कुछ समय उस पर विचार के लिए दिया जाता है। चूंकि जीडी में चार से आठ कैंडिडेट हिस्सा लेते हैं, इसलिए उस विषय पर प्रत्येक को लगभग १० मिनट में अपनी बात रखने का मौका दिया जाता है। कई बार उक्त विषय पर कई चक्रों में भी अभ्यर्थी अपनी बात रखते हैं। इसकी तैयारी के लिए निम्नलिखित स्ट्रेटेजी बनाकर अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है :
समूह में अध्ययन करें और विभिन्न विषयों पर आपस में परिचर्चा करें।
किसी भी विषय पर गहन चिंतन करें और उस पर अपने निष्कर्ष निकालें, जिससे कि उस पर आपकी मौलिक सोच सामने आए।
अपनी बात को तार्किक ढंग से रखें। आपकी भाषा और शैली प्रभावशाली होनी चाहिए।
जागरूक रहें और देश-दुनिया में घट रही घटनाओं की अद्यतन जानकारी रखें।
पढाई कर रहे स्टूडेंटस अपने विषय पर पूरी पकड रखें।
सभी कैंडिडेटस कम्युनिकेशन स्किल डेवलॅप करने पर भी अधिकतम ध्यान दें।
इंटरव्यू में डालें अपनी छाप
साक्षात्कार का उद्देश्य यह जानना होता है कि आप कितने कॉन्फिडेंट हैं। चूंकि लिखित परीक्षा के रूप में आपकी टेक्निकल और कॉन्सेप्चुअल जानकारी की परख पहले ही की जा चुकी होती है, इसलिए इंटरव्यू में एक लीडर और एक मैनेजर के रूप में आपकी क्वालिटी को जांचने-परखने की कोशिश की जाती है। इसके तहत आपकी पर्सनैलिटी, अनुशासन, सेल्फ अवेयरनेस, आप अपने लक्ष्य के प्रति कितने स्पष्ट हैं, आदि की परख की जाती है। इन सभी के बारे में आप कितने कॉन्फिडेंस के साथ अपनी बात को रखते हैं और सामने वाले को प्रभावित करते हैं, इस बात का भी पूरा ध्यान इंटरव्यू के दौरान रखा जाता है। इंटरव्यू की तैयारी करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए :
यदि आपने रट कर परीक्षा पास कर ली है, तो ऐसी स्थिति में विषयों पर धारणात्मक समझ विकसित करें।
अगर कहीं काम कर रहे हैं, तो उसके बारे में आपको गहरी जानकारी है या नहीं!
अपनी अकेडमिक उपलब्धियों का विश्लेषण करें।
अगर आपकी कोई हॉबी है, तो इंटरव्यू में इस बारे में भी चर्चा करें।
खुद में कॉन्फिडेंस डेवलॅप करें और जो भी कहें पूरे विश्वास से कहें।
इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों की बात ध्यान से सुनने के बाद ही अपनी बात पूरी विनम्रता से कहें।
क्रॉस क्वेश्चन खुद कभी न करें।

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