गुरुवार, 23 फ़रवरी 2017

कुछ कविताएँ - अर्चना सिंह 'जया'

कविता का अंश... पाठशाला से जब घर जाते बच्चे... मेघ देख शोर मचाते बच्चे, पाठशाला से जब घर जाते बच्चे। छप-छप पानी में कूद लगाते कीचड़ में खुद को डुबोते रिम-झिम बारिश की बॅूंदों में झूम-झूम कर हॅंसते गाते। पाठशाला से जब घर जाते बच्चे। मोर पंख से रंग बिरंगे सपने इनके बाहर निकलते कपड़ों की न चिंता करते दौड़ भाग कर धूम मचाते। पाठशाला से जब घर जाते बच्चे। पापा-मम्मी की एक न सुनते हरदम अपने दिल की करते तन मन अपना खुशियों से भरते। पाठशाला से जब घर जाते बच्चे। ऐसी ही अन्य कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

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