बुधवार, 27 मई 2009

क्यों महंगी होती हैं डीजल कारें


क्यों महंगी होती हैं डीजल कारें
डिजाइनिंग के पेशे से जुड़े प्रयास गुप्ता एक दिन अपने मुंबई ऑफिस में बैठे बड़े ध्यान से कार की प्राइस लिस्ट देख रहे थे। इसके ठीक एक दिन पहले उनकी पत्नी ने उन्हें याद दिलाया था कि उनकी कार छह साल पुरानी हो चुकी है और अब इसे बदलने की जरूरत है। अपनी कार की मौजूदा हालत को देखते हुए उन्होंने इस बार नई डीजल कार खरीदने की सोची, हालांकि डीजल कार खरीदने का फैसला करने के बाद वह ज्यादा संशय की स्थिति में पहुंच गए।
गुप्ता ने एक बार फिर कार की कीमतों की सूची देखी। इस सूची में स्विफ्ट वीएक्सआई (एबीएस) की कीमत 5,25,801 रुपए थी, वहीं इसके डीजल मॉडल स्विफ्ट वीडीआई (एबीएस) की कीमत 5,98,736 रुपए थी। इन दोनों कार मॉडलों के बीच 72,935 रुपए का बड़ा अंतर प्रयास गुप्ता को देखने को मिला। गुप्ता यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर क्यों डीजल वर्जन की कीमत पेट्रोल वर्जन से इतनी ज्यादा है और अपनी इसी उत्सुकता को उन्होंने अपने रीटेलर के सामने रखा।
मारुति सुजुकी के इंजीनियरिंग डिवीजन के चीफ जीएम सी वी रमन के पास इसका जवाब है। उन्होंने बताया, 'जब डीजल और पेट्रोल वर्जन की बात आती है तो अधिकतर मामलों में एक ही मॉडल की कार की इंजन क्षमता में काफी अंतर होता है। आमतौर पर डीजल इंजन अधिक क्षमता वाला होता है।' अगर हम गौर करें तो पता चलता है कि हिंदुस्तान एबेंसडर में 1.8एल एमपीएफआई का पेट्रोल इंजन होता है, जबकि डीजल इंजन की क्षमता 2.0 एल होती है।
हालांकि, कार की नई कीमतें बताती हैं कि यह कोई जरूरी नहीं है कि अगर इंजन की क्षमता अधिक हो, तो उसकी कीमत भी अधिक होगी। रमन ने बताया कि आमतौर पर डीजल इंजन में पेट्रोल इंजन की तुलना में ज्यादा महंगे उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
रमन ने बताया, 'पेट्रोल की तुलना में डीजल ज्यादा गर्मी पैदा करता है। इसके अलावा डीजल इंजन में फ्यूल-एयर मिक्सचर चालू करने के लिए कोई स्पार्क प्लग नहीं होता है। डीजल इंजन में गाड़ी तभी स्टार्ट होती है, जब यह हवा लेता है और इसमें दबाव पैदा होता है। कम्प्रेस्ड हवा की गर्मी से डीजल इंजन चालू होता है।'
जानकारों का कहना है कि हाई ऑपरेटिंग टेम्परेचर इस बात को सुनिश्चित करता है कि डीजल इंजन का रिस्पांस बेहतर रहे। डीजल इंजन वाले कार मॉडल्स में महंगे उपकरणों के अलावा टर्बोचार्जर के साथ ऑयलबर्नर भी लगे होते हैं, जिससे इसकी कीमत बढ़ जाती है। टर्बोचार्जर एक ऐसा इंडक्शन सिस्टम है, जो वजन में ज्यादा बढ़ोतरी किए बगैर इंजन की क्षमता में इजाफा करता है। यह उस हवा पर तेजी से दबाव बनाता है, जो इंजन के अंदर बहती है।
इसका मतलब है कि सिलेंडर में अधिक हवा आ सकती है और ज्यादा हवा का मतलब है कि जब गाड़ी चलती है, तो इसे ज्यादा क्षमता हासिल होती है। इसके अलावा गुप्ता के रीटेलर ने उन्हें यह भी बताया कि ईंधन की क्षमता के लिहाज से भी स्विफ्ट का डीजल वर्जन ज्यादा बेहतर होगा। हालांकि, ईंधन क्षमता की बात आने पर खरीददार के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि ऐसा कैसे होगा?
हालांकि, इस सवाल का उत्तर पूरी तरह से डीजल की बेहतर गुणवत्ता पर निर्भर करता है। पेट्रोल की तुलना में डीजल ज्यादा ऑयली और भारी होता है। इसके अलावा डीजल से कार्बन परमाणु की लंबी श्रृंखला तैयार होती है, जो पेट्रोल की तुलना में इंजन को ज्यादा क्षमता मुहैया कराती है।
पर्यावरण के लिहाज से भी पेट्रोल की तुलना में डीजल बेहतर होता है, क्योंकि इससे काफी कम हाइड्रोकार्बन, कार्बन डाई आक्साइड और कार्बन मोनो आक्साइड का उत्सर्जन होता है। ये सभी रासायनिक तत्व ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि, डीजल की खामी यह है कि इसमें से अधिक मात्रा में नाइट्रोजन कम्पाउंड निकलते हैं। इन सब बातों पर गंभीरता से विचार करने के बाद गुप्ता ने आखिरकार स्विफ्ट वीडीआई खरीदने का फैसला लिया।

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उपयोगी जानकारी..

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  2. बहुत ही अच्छी जानकारी दी आपने। अक्सर हम भी यही सोचा करते थे। अब जाकर जिज्ञासा शान्त हुई।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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