
टेलीकॉम ऑपरेटर वोडाफोन के जूजू विज्ञापन को पेटा (पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट फॉर एनिमल्स) ने भारत का पहला ग्लिटर बॉक्स पुरस्कार दिया है।
लेकिन, क्यों मिला ये अवॉर्ड?
पेटा का कहना है कि यह पुरस्कार विज्ञापनों में वास्तविक जानवरों की जगह मानव विकल्पों का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को दिया जाता है। पेटा ने इससे पहले वोडाफोन के पुराने विज्ञापनों में जानवरों के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई थी।
पेटा की चीफ फंक्शनरी अनुराधा साहनी का कहना है कि इस विज्ञापन की लोकप्रियता से यह साबित होता है कि जानवरों के इस्तेमाल के बिना भी संदेश को पहुंचाने के बहुत से अन्य रास्ते मौजूद हैं।
वोडाफोन के ऐड कैरेक्टर 'जूजू'
इन छोटे-छोटे सफेद चेहरे हैं 'जूजू', जो इन दिनों वोडाफोन के ऐड में नजर आ रहे हैं। वोडाफोन अपनी वैल्यू ऐडेड सर्विसेज के ऐड में इन्हें पेश कर रही है। ऐड फिल्म्स बनाने वाली कंपनी निर्वाण फिल्म्स ने जूजू कैरेक्टर्स के साथ ये ऐड बनाए हैं, जिन्हें दर्शक खूब पसंद कर रहे हैं। इससे पहले वोडाफोन का कुत्ते (पग) वाला ऐड भी निर्वाण फिल्म्स ने ही बनाया था।
रीयल कैरेक्टर हैं जूजू
आपको यह देखकर लगता होगा कि ये एनिमेटेड कैरेक्टर्स हैं, जो मानवीय संवेदनाएं दिखाते हैं। पर ऐसा नहीं है। ये मुंबई के लोकल थिएटर से लिए गए स्लिम वुमन एक्टर्स हैं, जिन्हें सफेद कपड़े पहनाकर जूजू का रूप दिया गया है।
जूजू का क्रेज जबर्दस्त
जूजू का क्रेज इतना ज्यादा है कि वोडाफोन के ऐड यूट्यूब पर सबसे ज्यादा वॉच किए जाने वाले विडियो हैं। फेसबुक पर जूजू के 1 लाख 30 हजार से ज्यादा फैन्स हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
क्यों आए जूजू?
दरअसल वोडाफोन अपने कुत्ते वाले 6 साल पुराने विज्ञापन को बदलना चाहती थी और कुछ नया भी करना चाहती थी। इसके बाद वोडाफोन ने निर्वाण फिल्म्स को इस तरह का कोई ऐड बनाने को कहा और जूजू का कॉन्सेप्ट भी हिट कर गया।
क्या है वोडाफोन का प्लान?वोडाफोन आईपीएल सीरीज के दौरान 30 अलग-अलग तरह के जूजू ऐड पेश कराना चाहती है। हर ऐड कंपनी की किसी न किसी वैल्यू ऐडेड सर्विस को प्रमोट करने के लिए होगा।
हम भी जूजू के फैन हैं
जवाब देंहटाएंइन्हें पुरस्कार मिलना सच में अच्छी खबर है
वैसे जूजू का हर ऐड कितनी भी बार देखो मजा आता है।
सबसे अच्छा है
इंटरनेशनल रोमिंग वाला