शुक्रवार, 8 मई 2009

सोने के पिंजरे में छटपटाती व्योमबालाएँ


डॉ. महेश परिमल
व्योमबाला, हवाई परी यानी एयर होस्टेस, भला किस युवती की चाहत नहीं होती होगी कि वह एयर होस्टेस बने और देश-विदेश की सैर करे। आकाशीय मार्ग पर विचरना एक आल्हादकारी सपना है। इस सपने को पूरा करती हैं, अपनी मुस्कानें बिखेरकर देश की व्योमबालाएँ। विमान यात्री अपनी पूरी यात्रा भूल सकता है, पर विमान परिचारिका की मुस्कान उसे जिंदगीभर याद रहती है। यही मुस्कान उनके जीवन का अभिन्न अंग है। उसकी नौकरी का सबसे आवश्यक उपादान, प्यारी सी बिंदास मुस्कान के बिना इस व्योमबाला की नौकरी की कल्पना ही नहीं की जा सकती। हर पालक चाहता है कि उसकी बिटिया व्योमबाला बनकर देश की सेवा करे। युवतियों का दिल भी व्योमबाल बनने की चाहत पर एक-दो बार तो धड़क ही जाता है। पर यह पालकों और युवतियों के लिए एक चेतावनी है कि यह भी एक जानलेवा नौकरी साबित हो रही है। हाल ही में कुछ एयर होस्टेस ने जिस तरह से आत्महत्या का सहारा लिया है, उससे यही लगता है कि मुस्कान बिखरने वाली इन युवतियों के जीवन की मुस्कान उनसे रुठ गई है।
मुंबई में एक महीने के दौरान दूसरी एयर होस्टेस ने आत्महत्या कर ली। वेलेंटाइन डे पर किंगफिशर एयरलाइंस में नौकरी करने वाली अनुश्री दत्ता की आत्महत्या के पीछे यही कारण बताया जा रहा है कि उस दिन वेलेंटाइन डे था और उसके प्रेमी ने उसे घूमने ले जाने के लिए मना कर दिया। इसी तरह अंधेरी में रहने वाली 20 वर्षीय अनुपमा आचार्य की आत्महत्या का कारण यह है कि उसके प्रेमी ने उसे सिगरेट पीने के लिए मना किया। इससे आवेश में आकर उसने आत्महत्या कर ली। जब इस मामले में पुलिस ने गहराई से छानबीन की, तो पता चला कि अनुपमा को अपनी नौकरी जाने का भय सता रहा था, इसलिए उसने आत्महत्या कर ली।
एयर होस्टेस की नौकरी बाहर से खूब ग्लैमरेस मानी जाती है। उनका वेतन भी किसी बड़ी कंपनी के एक्जीक्यूटिव के वेतन के बराबर होता है। जब इस नौकरी में इतनी सुख-सुविधाएँ हैं, तो फिर एयर होस्टेस आत्महत्या का सहारा क्यों लेने लगी है। अभ 18 मार्च को ही अनुपमा ने पाँचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज हमारे सामने जो हजारों व्योमबालाएँ हैं, वे सभी कहीं न कहीं किसी न किसी तनाव से ग्रस्त हैं। वैसे ेदेखा जाए, तो ऐसी कोई भी नौकरी नहीं है, जिसमें तनाव न हो। पर एयर होस्टेस जैसे ग्लैमरस नौकरी के बारे में ऐसा नहीं सोचा जा सकता। हर हँसी के पीछे कहीं न कहीं वेदना छिपी होती है। विमान यात्री व्योमबाला की मुस्कान पर इस तरह से न्योछावर हो जाता है कि उसे पता ही नहीं चलता कि इस हँसते-मुस्कराते चेहरे के पीछे कई वेदनाएँ छिपी हुई हैं। शुरुआत में यह नौकरी बहुत ही अच्छी लगती है। नए-नए शहर देखना, रोज ही नए-नए लोगों से मुलाकात होना, परिचय का दायरा बढऩा आदि सब कुछ बहुत ही अच्छा लगता है। बस एक दो साल बाद ही इस नौकरी में तनाव आना शुरू हो जाता है। रात्रि जागरण, परिजनों से दूर, भोजन की अनियमितता, अमीर यात्रियों के नखरों के बाद भी मुस्कान बिखेरते रहना, पुरुषों की पैनी निगाहों का सामना करना आदि ये सब तनाव को जन्म देने वाले कारक बन जाते हैं।
एयर होस्टेस की नौकरी ऐसी होती है कि इसमें कई दिनों तक घर से बाहर रहने, परिजनों से दूर रहने की स्थितियाँ आती हैं। इनका काफी वक्त पायलट साथियों के साथ गुजरता है। अनजाने शहरों में उनके रहने की व्यवस्था एक ही होटल में की जाती है, इससे ये इनके प्रेम में पड़ जाती हैं। इसके अलावा एयर होस्टेस की सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि उसका वजन नहीं बढऩे पाए। कहीं उसका फिगर बिगड़ गया, तो नौकरी जाएगी ही, नहीं तो संभव है उसे किसी अन्य काम पर लगा दिया जाए, जहाँ वेतन बहुत ही कम होता है। इसके साथ ही यदि किसी एयर होस्टेस ने शादी कर ली, तो उसे लूप लाइन में डाल दिया जाता है। इसलिए ये या तो शादी नहीं करती, या फिर शादी की बात को छिपाकर रखती हैं। इस दौरान भी वह अकसर बाहर रहती है, जहाँ उनका कई पुरुषों से मिलना होता है, इससे उनके दाम्पत्य जीवन में भी दरार आ जाती है।
एविएशन उद्योग में काम करने वाले लोग कहते हैं कि इस क्षेत्र में विवाहेत्तर संबंध खूब फलते-फूलते हैं। जो महिला अपने पति के साथ सुखी दाम्पत्य जीवन बिताना चाहती है, उसे कभी एयर होस्टेस नहीं बनना चाहिए। यदि कोई अविवाहित एयर होस्टेस अपने सहकर्मी पायलट के प्रेम में पड़ जाती है,पर उसके साथ शादी करना आसान नहीं होता। ये पायलट या तो विवाहित होते हैं, या फिर उनके संबंध अन्य एयर होस्टेस से भी होते हैं। इसके बाद भी यदि उनकी शादी हो जाती है, तो उनके सफल दाम्पत्य जीवन की कोई गारंटी नहीं होती। जिस युवती ने अपना दाम्पत्य जीवन अपने इस कैरियर में होम कर दिया,वही सफल मानी जाती है।
मुंबई के मनोचिकित्सकों के पास इलाज के लिए आने वाले मनोरोगियों में एयर होस्टेस की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे ही एक क्लिनिक में आई एक व्योमबाला ने बताया कि जब से उसने विमान में प्रवेश किया है, तब से वह इतनी दु:खी है कि वह जी-भरकर रोना चाहती थी, पर कहीं आई लाइनर बिगड़ न जाए, इस भय से वह ठीक से रो भी नहीं पाती है। ये नौकरी ऐसी है, जो एयर होस्टेस को जी भरकर रोने भी नहीं देती। कितनी विवशता है, इस नौकरी में। अपनी तमाम भावनाओं को छिपाकर केवल मुस्कान बिखेरने का काम करने वाली ये एयर होस्टेस आखिर क्या करे? इसी तनाव में आकर वह छोटी उम्र में ही व्यसनों का सहारा लेने लगती हैं। मन की व्यथा छिपाने का इससे बड़ा साधन और क्या हो सकता है भला?
एयर होस्टेस की नौकरी में नींद के घंटे तय नहीं होते। इसका पूरा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है। स्वास्थ्य बिगड़ा कि बाहर का सौंदर्य भी बिगड़ा। इसे छिपाने के लिए फिर मेकअप का सहारा लेना पड़ता है। डिपे्रशन से बचने के लिए वे अधिक भोजन करना शुरू कर देती हैं, इससे उनका वजन बढऩे लगता है और फिगर बिगडऩे लगता है। इसे सँभालने के लिए डायटिंग करनी पड़ती है। परेशानियाँ इतने पर ही खत्म नहीं होती। नारी के लिए प्रकृति ने 5 दिन ऐसे दिए हैं, जिस दौरान वह आराम कर सकती हैं। जी हाँ मासिक स्राव के दौरान भी इन एयर होस्टस को अवकाश नहीं मिलता। ये नौकरी सोने के पिंजरे की तरह है। इसमें कैद होकर आज व्योमबालाएँ छटपटा रही हैं। अनुपमा की मौत ने इस नौकरी के कई ऐसे पहलुओं को सामने लाया है, जो पालकों एवं युवतियों के लिए एक चुनौती है। यदि कोई युवती एयर होस्टेस की नौकरी को अपना कैरियर बनाना चाहती है, तो उसे इस नौकरी के अन्य पहलुओं के बारे में अच्छी तरह से सोच लेना चाहिए। हाँ यदि आज की युवतियाँ तलवार की तीखी धार पर चलना चाहती हैं, तो आगे बढ़कर वे इस परंपरा को तोडऩे में वे अहम भूमिका निभा सकती हैं।
डॉ. महेश परिमल

1 टिप्पणी:

  1. इस कैरियर का इतना दुखद पक्ष भी है .. आपके आलेख से अच्‍छी जानकारी मिली .. धन्‍यवाद।

    उत्तर देंहटाएं

Post Labels