मंगलवार, 27 अक्तूबर 2015

कविता बाबुल की गलियॉं

इस कविता में बचपन की यादें समाई हुई हैं। हम कितने भी बडे हो जाएँ, माता पिता एवं अपनों के साथ्‍ा गुजारे बचपन के दिन कभी नहीं भूल सकते। ये दिन हमारे एकांत का खालीपन भरते हैं। इन्‍हीं यादों को कविता में उतारा गया है।

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