शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

........वो लड़की


नीरज नैयर
हमारा समाज जिसे नारी उत्थान के नाम पर अपनी दुकान चलाने वाले पुरुष प्रधान कहना पसंद करते हैं, इस समाज में हमेशा से ही महिलाओं को कमजोर माना जाता है और शायद यही वजह है कि अब उन्होंने अपनी कमजोर छवि का फायदा उठाना सीख लिया है. आज न जाने कितने ऐसे मामले होंगे जहां महिलाओं के हाशिए पर पुरुष हैं, इसे विडंम्बना ही कहा जाएगा कि जहां महिलाओं की हल्की सी आह पर लोगों को हुजूम लग जाता है वहीं पुरुषों के कराहने पर भी कोई नहीं आता. फिर चाहे उसमें कितनी भी सच्चाई ही क्यों न हो. कहते हैं हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है मगर इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कभी न कभी, कहीं न कहीं, किसी न किसी पुरुष की बर्बादी की सूत्रधार भी महिला ही होती है. कभी-कभी हमारी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आते है जहां पहुंचकर सबसे प्रिय लगने वालों के ख्याल से भी नफरत होने लगती है. ऐसी ही एक सच्चाई से जब मैं रू बरू हुआ तो शायद कुछ हद तक मेरी भी सोच महिलाओं के प्रति बदली. बात कुछ पुरानी है, जिस पर अब धूल की चादर चढ़ चुकी है, इस धूल को मैं न भी हटाता अगर आज मुझे वो चेहरा न दिखाई पड़ता. जिसने सदा मुस्कुराने वाले आकाश के जीवन में खामोशी भर दी. मैं उसे रोकरकर पूछना चाहता था कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया मगर किस्मत को ये मंजूर नहीं था. मैं और आकाश एक ही आफिस में काम करते थे, आकाश बहुत ही हंसमुख स्वभाव का था. शायद ही कोई ऐसा होगा जो उसे नापंसद करता हो. वो रोते हुए को पल में हंसा देता था मगर जब वो रोया तो कोई उसे हंसा नहीं पाया. मंगलवार का वो दिन में कभी नहीं भूल सकता जब सादगी और मासूमियत वाली शिखा ने हमारे दफ्तर में प्रवेश किया. वो लड़की कुछ अलग ही थी, जब सब कैंटीन में बैठे हंस रहे होते तो वो किसी कोने में गुमसुम सी सोच में डूबे रहा करती थी. उसकी आंखों को देखकर हमेशा ऐसा लगता मानो वो जन्मों के दर्द को अपने अंदर समाए हो. वह अपने आप को फाइलों में इस कदर उलझाया करती मानों किसी से भाग रही हो. उसके आफिस में होते हुए भी न होने का अहसास रहता था. सबकुछ धीरे-धीरे यूं ही चलता रहा, वो रोज आती अपना काम निपटाती और चली जाती. किसी ने कभी भी उससे कुछ पूछने का प्रयास नहीं किया, शायद कोई उसे परेशान नहीं करना चाहता था. फिर एक दिन एक पार्टी में जो कुछ भी हुआ उसने हम सभी को झकझोंर कर रख दिया. जिस पार्टी में हम पहुंचे वहां शिखा भी मौजूद थी, पार्टी में जहां सब चहक रहे थे वहीं पेड़ से टेक लगाए खड़ी शिखा के चेहरे पर मासूमी साफ झलक रही थी. आकाश से शायद उसकी ये उदासी देखी नहीं गई, वह उसके पास पहुंचकर उसका मूड ठीक करने की कोशिश करने लगा. मैं दूर खड़ा सबकुछ देख रहा था, अचानक शिखा की चीख ने वहां मौजूद हर शख्स को हिला दिया. उसकी आंखों से टपकते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि उसके दर्द का प्याला अब छलक चुका है. वह रोती जा रही थी और कहती जा रही थी कि मैं नहीं हंसना चाहती. रोते-रोते जब उसने अपनी दास्तां बयां की तो सभी की आंखों में आंसू छलक आए. उसने बताया कि उसके पिता का एक हफ्ते पहले ही देहांत हुआ, उन्हें कैंसर था. मां को भी कैंसर है और वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है. एक छोटा भाई है जिसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है. पल-पल अपनी मां को दम तोड़ते देखने के बाद भी भला कोईहँससकता है बताओ. उसने आकाश को हिलाते हुए पूछा. उस वक्त आकाश ही क्या हम किसी के पास कोई जवाब नहीं था. वो रात कैसे कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर गई पता ही नहीं चला. सुबह जब वो दफ्तर आई तो सबसे पहले उसने आकाश से माफी मांगी, मैं थोड़ा चौंका जरूर मगर दोनों को अकेला छोड़कर वहां से चला गया. उस दिन के बाद आकाश और शिखा के बीच संवाद ज्यादा होने लगा. वो आकाश को अपने घर की हर छोटी से छोटी बात बताती और आकाश मुझे. उसकी आंखें हमेशा आकाश को तलाशती रहती थीं, हम सब इस बात से खुश थे. ये सिलसिला यूं ही चलता रहा, आकाश शिखा की खुशी से शुश था और मैं उसकी खुशी से. फिर अचानक मुझे कंपनी के काम से बाहर जाना पड़ा, आकाश और शिखा दोनों मुझे स्टेशन छोडऩे आए. वैसे तो मैं चंद दिनों के लिए जा रहा था परंतु मैं इस बात से अंजान था कि आकाश से ये मेरी आखिरी मुलाकात होगी. एक हफ्ते बाद जब मैं लौट के आया तो सबकुछ पहले जैसा था मगर आकाश और शिखा की सीट खाली थी. पहले तो मैं समझा कि शायद दोनों छुट्टी मना रहे होंगे मगर जब हकीकत से मेरा सामना हुआ तो मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई. मुझे बताया गया कि शिखा ने पूरे स्टाफ के सामने आकाश पर जो इल्जाम लगाए उसे वो बर्दाश्त नहीं कर सका. शिखा ने कहा कि मेरे पिता की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है और मेरी मां सदमें के चलते कोमा में है. एक छोटा भाई है जो हादसे के बाद अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है. मैं यहां अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही हूं ताकि उसका इलाज करा सकूं. पर आकाश ने मेरा जीना मुहाल कर दिया है, वह दिन-रात मुझे फोन करता है, आफिस में भी मौका देखकर मेरे पास आ जाता है. रोज घर से दफ्तर तक मेरा पीछा करता है, मुझे सरेराह रोककर एक ही बात कहता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं. कभी-कभी मैं सोचती हूं कि आत्महत्या कर लूं लेकिन भाई का ख्याल मुझे ऐसा करने नहीं देता. नारी के आंसूओं में कितनी ताकत होती है यह एक बार फिर मालूम चला, मुझे सहज विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मासूम सी दिखने वाली लड़की का इतना भयानक रूप भी हो सकता है. सबकी नजर में शायद आकाश गुनहगार था मगर मैं जानता था कि सच क्या है. उस दिन पार्टी में उसने जो कहानी बताई थी वो इससे बिल्कुल अलग थी अगर आफिस वाले वहां होते तो उन्हें भी शिखा की असलीयत पता चल गई होती. मैं शिखा से पूछना चाहता था कि आखिर उसे आकाश को इतना बड़ी सजा क्यों दी. मैं उसके घर पहुंचा, मगर वहां भी मेरा शिखा नहीं उसकी एक और हकीकत से सामना हुआ. मुझे मालूम चला कि शिखा की मां तो है ही नहीं, एक बड़ा भाई और पिता हैं जो सालों से उसके साथ नहीं रहते. इसके बाद मैं सीधा आकाश के घर पहुंचा तो वहां भी ताला लगा पाया. कई दिन ऐसे ही गुजर गये, न मुझे आकाश ही मिला और न शिखा. फिर एक दिन मुझे एक पत्र मिला जिस पर भेजने वालेे का नाम और पता कुछ नहीं था. मैंने उसे खोलकर देखा तो वह आकाश का पत्र था. उसने लिखा, मेरे दोस्त अब तक शायद तुम्हें पता चल ही गया होगा, मैं ये नहीं जानता कि उसने ऐसा क्यों किया, हो सकता है उसकी भी कोई मजबूरी रही होगी. मगर मुझे बहुत ठेस पहुंची है, मैं विश्वास नहीं कर पा रहा हूं कि कोई ऐसा भी कर सकता है. मुझे इस बात की कोई परवाह नहीं कि सब मेरे बारे में क्या सोचते होंगे, मुझे पता है कि मेरा दोस्त मेरे साथ हैं. मैं अब उस शहर में पुरानी यादों के साथ नहीं जी सकता इसलिए मैं बहुत दूर चला आया हूं. मेरी चिंता मत करना मैं कुछ गलत नहीं करूंगा, क्योंकि मैं कायर नहीं. मैं जिऊंगा लेकिन किस मकसद के साथ नहीं कह सकता. मैं उससे बहुत प्यार करता था, हम दोनों ने शादी तारीख भी तय कर ली थी, फिर पता नहीं क्यों उसने ऐसा किया. पता नहीं क्यों. तुम्हारा आकाश. इसके बाद मैंने शिखा से मिलने की बहुत कोशिश की, पर वो घर छोड़कर कहीं और जा चुकी थी. मेरा दोस्त आज कहां हैं मैं नहीं जानता, हां कभी-कभी उसके पत्र जरूर मिल जाया करते हैं. मैंने एक दोस्त खोया, वो दोस्त जिसने कभी किसी का बुरा नहीं चाहा, फिर भी उसके साथ बुरा हुआ. मुझे इंतजार है तो बस उस दिन का जब मेरा दोस्त वापस आएगा लेकिन यह इंतजार खत्म होगा भी या नहीं मैं नहीं जानता.
नीरज नैयर

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