अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

2:04 pm
कहानी का अंश... एक राजा था। उसकी छह रानियाँ थीं। पर उसकी कोई संतान नहीं थी। इस कारण वह हमेशा दुखी रहता था। किसी ज्योतिषी के कहने पर उसने अपने राज्य में यह ढिंढोरा पिटवा दिया कि उसके राज्य में रात दस बजे के बाद कोई भी दीपक न जलाए। राजा की इस आज्ञा के कारण पूरे राज्य में रात दस बजे के बाद एकदम अँधेरा हो जाता था। उसी राज्य में एक भिखारिन अपनी बेटी के साथ रहती थी। एक दिन उसकी बेटी ने रात को दीपक जलाया और खाना बनाने लगी। जब माँ ने यह देखा तो उसने बेटी को दीपक न जलाने के लिए कहा और राजा की आज्ञा तथा उसके नि:संतान होने की बात बताई। बेटी बोली कि माँ यदि राजा उससे शादी कर ले, तो उसकी सुनहरे बालों वाली दो संताने हो सकती है। संयोग की बात यह बात राजा के सिपाहियों ने सुन ली और राजमहल में जाकर पूरी बात राजा को बता दी। राजा उस भिखारिन की बेटी से विवाह करने के लिए तैयार हो गया। वह भिखारिन पहले तो अचकचाई लेकिन राजा की जिद के आगे वह भला क्या कर सकती थी। और फिर दोनों का विवाह हो गया। भिखारिन की बेटी राजमहल में आ गई। छहों रानियाँ उसे रानी के रूप में देखकर जलभुन गई। कुछ दिनों बाद सातवीं रानी गर्भवती हुई और समय आने पर उसने दो संतान के रूप में एक लडका और एक लडकी को जन्म दिया। राजा उस समय शिकार पर गया हुआ था। उसे यह बात मालूम नहीं थी। उधर छहों रानियों ने उन संतानों को पिटारे में बंद करके नदी में फिकवा दिया और उस रानी के पास बिल्ली के बच्चे रख दिए। जब राजा वापस आया तो बिल्ली के बच्चे देखकर बहुत नाराज हुआ और उसने सातवीं रानी को अँधेरी कोठरी में डलवा दिया। बेचारी रानी बहुत कहती रही लेकिन उसकी कोई बात नहीं सुनी। दूसरी तरफ उस पिटारे पर एक साधु की नजर पड़ी उसने उन बच्चों को पाल पोस कर बड़ा किया। कुछ साल बाद उस साधु की मृत्यु हो गई लेकिन मृत्यु के पूर्व उसने उन दोनों बच्चों के लिए रहने का अच्छा प्रबंध कर दिया। वे दोनों बच्चे अपने पिता के राज्य में आकर ही रहने लगे। छहों रानियों की नजर उन भाई-बहनों पर पड़ी तो उन्हें शक हुआ। अपना शक दूर करने के लिए एक रानी उनके घर गई और बहन से कहा कि तुम्हारा मकान तो बहुत सुंदर है लेकिन यहाँ पर वाकली के फूल की कमी है। उसके बिना सब सुंदरता अधूरी है। तब बहन ने भाई से वाकली का फूल लाने की जिद की। क्या भाई अपनी बहन की जिद पूरी कर पाया? उसे किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा? सातवीं रानी क्या अंधेरी कोठरी में ही पड़ी रही? क्या राजा को सच्चाई पता चली? यह सारी बातें जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए....

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.