शनिवार, 17 दिसंबर 2016

कबीरदास - कुछ लोकप्रिय दोहे अर्थ सहित

संत कबीरदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि हैं, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरों पर कुठाराघात करते रहे। वह कर्म प्रधान समाज के पैरोकार थे और इसकी झलक उनकी रचनाओं में साफ़ झलकती है। लोक कल्याण हेतु ही मानो उनका समस्त जीवन था। कबीर को वास्तव में एक सच्चे विश्व - प्रेमी का अनुभव था। कबीर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनकी प्रतिभा में अबाध गति और अदम्य प्रखरता थी। समाज में कबीर को जागरण युग का अग्रदूत कहा जाता है। यहाँ हम उनके कुछ लोकप्रिय दोहे अर्थ सहित प्रस्तुत कर रहे हैं - दोहा:- हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मरे, मरम न जाना कोई। अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि हिन्दुओं को राम प्यारा है और मुसलमानों (तुर्क) को रहमान| इसी बात पर वे आपस में झगड़ते रहते है लेकिन सच्चाई को नहीं जान पाते | दोहा:- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब | अर्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो| जीवन बहुत छोटा होता है अगर पल भर में समाप्त हो गया तो क्या करोगे| दोहा:- निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय| अर्थ: कबीर जी कहते है कि निंदा करने वाले व्यक्तियों को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्ति बिना पानी और साबुन के हमारे स्वभाव को स्वच्छ कर देते है| दोहा:- माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख| अर्थ: कबीरदास जी कहते कि माँगना मरने के समान है इसलिए कभी भी किसी से कुछ मत मांगो| दोहा:- साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय| अर्थ: कबीर दास जी कहते कि हे परमात्मा तुम मुझे केवल इतना दो कि जिसमे मेरे गुजरा चल जाये| मैं भी भूखा न रहूँ और अतिथि भी भूखे वापस न जाए| दोहा:- दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय| अर्थ:- कबीर कहते कि सुख में भगवान को कोई याद नहीं करता लेकिन दुःख में सभी भगवान से प्रार्थना करते है| अगर सुख में भगवान को याद किया जाये तो दुःख क्यों होगा| दोहा:- तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय। अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कभी भी पैर में आने वाले तिनके की भी निंदा नहीं करनी चाहिए क्योंकिं अगर वही तिनका आँख में चला जाए तो बहुत पीड़ा होगी| ऐसे ही अन्य दोहों का अर्थ सहित आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

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