डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता
सुनो माननीय शिवराज, इस आम आदमी की आवाज।
बनाओ ना इस मध्यप्रदेश को भारत के सर का ताज।।
तुमसे हमें बस इतना ही कहना है।
इस आम आदमी को खुशहाल मध्यप्रदेश में रहना है।।
सुना है...
कल रात एक माँ ने अपने बच्चे को भूखा सुलाया था।
एक पति ने अपनी पत्नी को पीट-पीटकर जलाया था।।
सुना है...
कल उस मूँछ वाले घूसखोर ने खूब कमाया था।
कल ही उसने अपना एक नया घर बनावाया था।
सुना है...
कल एक युवक कुछ रद्दी बेचकर आया था।
उसमें मार्कशीट थी, ९० प्रतिशत अंक पाया था।।
सुना है...
कल एक पिता ने अपने बेटे की चिता को जलाया ।
सरकारी डॉक्टर ने उसे अपने क्लिनिक बुलाया था।।
सुना है...
आप चाहते हैं कि हर आदमी इस प्रदेश को अपना माने।
पर इन तकलीफों को वह किस तराजू पर तौले।।
सुना है...
आप इन तकलीफों को हमसे दूर करेंगे।
तभी हम इसे अपना मध्यप्रदेश कहेंगे।।
डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता
शुक्रवार, 13 नवंबर 2009
.........एक गुजारिश शिवराज से
लेबल:
कविता

सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Post Labels
- अतीत के झरोखे से
- अपनी खबर
- अभिमत
- आज का सच
- आलेख
- उपलब्धि
- कथा
- कविता
- कहानी
- गजल
- ग़ज़ल
- गीत
- चिंतन
- जिंदगी
- तिलक हॊली मनाएँ
- दिव्य दृष्टि
- दिव्य दृष्टि - कविता
- दिव्य दृष्टि - बाल रामकथा
- दीप पर्व
- दृष्टिकोण
- दोहे
- नाटक
- निबंध
- पर्यावरण
- प्रकृति
- प्रबंधन
- प्रेरक कथा
- प्रेरक कहानी
- प्रेरक प्रसंग
- फिल्म संसार
- फिल्मी गीत
- फीचर
- बच्चों का कोना
- बाल कहानी
- बाल कविता
- बाल कविताएँ
- बाल कहानी
- बालकविता
- भाषा की बात
- मानवता
- यात्रा वृतांत
- यात्रा संस्मरण
- रेडियो रूपक
- लघु कथा
- लघुकथा
- ललित निबंध
- लेख
- लोक कथा
- विज्ञान
- व्यंग्य
- व्यक्तित्व
- शब्द-यात्रा'
- श्रद्धांजलि
- संस्कृति
- सफलता का मार्ग
- साक्षात्कार
- सामयिक मुस्कान
- सिनेमा
- सियासत
- स्वास्थ्य
- हमारी भाषा
- हास्य व्यंग्य
- हिंदी दिवस विशेष
- हिंदी विशेष
वाह सर,
जवाब देंहटाएंवाकई तारीफे काबिल है आपका लेख , लेकिन कौन सुनता है आपकी बात, किसको समय है इन सच्चाई को स्वीकारने की, समय भी हो तो हिम्मत किसकी है की इन हकीकत को स्वीकार सके।