बुधवार, 30 मार्च 2016
संबंध दरकने के दिन - डॉ. महेश परिमल
संबंध, वह भी अच्छे संबंध बहुत मुश्किल से बनते हैं। अच्छे संबंधों को लोग अपनी तरफ से निभाने की पूरी कोशिश करते हैं। अच्छे संबंध लोग बनाते ही इसलिए है कि जब हम मुसीबत में हों, परेशानी में हों, तब हमारे संबंधों की लाज रखने के लिए लोग आगे अाएँ और हमें मुसीबतों से बचाएँ या फिर इस मुसीबत में हमारा साथ दें। पर आजकल ऐसा नहीं हो रहा है। इस संबंध पर भी पानी ने गाज गिरा दी है। इस पानी से होने वाले विवाद ने एक झटके में अच्छे संबंधों को अलग कर दिया है। संबंधों की पुख्ता इमारत गिरने में ज़रा भी देर नहीं लगती। मुहावरों की भाषा में कहें तो हमारे चेहरे का पानी ही उतर गया है। कोई हमारे सामने प्यासा मर जाए, पर हम पानी-पानी नहीं होते। हाँ, मौका मिलने पर हम किसी को पानी पिलाने से बाज नहीं आते। अब कोई चेहरा पानीदार नहीं रहा। पानी के लिए पानी उतारने का कर्म हर गली-चौराहों पर आज आम बात हो गई है। संवेदनाएँ पानी के मोल बिकने लगी है। हमारी चपेट में आनेवाला पानी नहीं माँगता। हमारी चाहतों पर पानी फिर रहा है। पानी टूट रहा है और हम बेबस हैं। और क्या-क्या है पानी की हकीकत... ये जानने के लिए सुनिए डॉ. महेश परिमल का आलेख - संबंध दरकने के दिन...
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