बुधवार, 30 मार्च 2016
गुरूदक्षिणा - आरती रॉय
आरती रॉय की कहानियों को पढ़ते हुए ऐसा लगता है मानो ये तो हमारे ही आसपास के पात्र हों, जिनके बारे में हमने सोचा भी नहीं था कि इस पर कुछ लिखा भी जा सकता है। बिलकुल हमारे बीच का कोई व्यक्ति, जो हमारे बीच ही रहकर हमसे अनजाना-सा रहा है। आरती जब लिखती है तो लिखती ही चली जाती है। कुछ ही घंटों में तैयार होने वाली उनकी कहानियाँ बिलकुल उन्हीं की तरह सहज और सरल है। बिना किसी लाग-लपेट के वह अपने पात्रों के चरित्र को शब्दों का रूप दे देती हैं। उनकी कहानियों के पात्र स्वयं ही उनके पास चलकर आते हैं। पात्र तो हम सभी के बीच भी होते हैं, पर हम में से हर कोई उसे सँवार नहीं पाता। आरती ये कला खूब जानती हैं। फुलमतिया इस कहानी का एक ऐसा ही सरल पात्र है, जो हमारा मन मोह लेता है। प्रस्तुत है कहानी का कुछ अंश - मैं जैसे आसमान से गिर पड़ा। समाज में निहित विसंगतियों, विकृतियों, रूढि़यों का प्रभाव इस शहर में इस भॉंति होगा, मैं सोच भी नहीं सकता था। मुझे समझ में नहीं आया कि उसके मन में ये कैसे बिठाऊँ कि हम सभी बराबर होते हैं। ऊँच-नीच, छोटा-बड़ा ये भेदभाव हम मनुष्य ने ही बनाए हैं। ईश्वर ने तो हम सभी को एक समान ही बनाया है। मैंने उसकी करूणायुक्त आँखों को प्यार से देखा। उसके सिर पर हाथ फेरा। पूरी कक्षा की लड़कियों में विस्मय झलक रहा था। मैंने प्यार से उसका नाम पूछा। वह बोली - फुलमतिया। कौन थी ये फुलमतिया और लेखक को उसके प्रति इतनी करूणा और संवेदना क्यों थी कि वो समाज के भेदभाव की गंभीर समस्या को लेकर सोचने लगे थे। इन सारे प्रश्नों के उत्तर पाने के लिए सुनिए कहानी - गुरूदक्षिणा...
लेबल:
कहानी,
दिव्य दृष्टि

सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Post Labels
- अतीत के झरोखे से
- अपनी खबर
- अभिमत
- आज का सच
- आलेख
- उपलब्धि
- कथा
- कविता
- कहानी
- गजल
- ग़ज़ल
- गीत
- चिंतन
- जिंदगी
- तिलक हॊली मनाएँ
- दिव्य दृष्टि
- दिव्य दृष्टि - कविता
- दिव्य दृष्टि - बाल रामकथा
- दीप पर्व
- दृष्टिकोण
- दोहे
- नाटक
- निबंध
- पर्यावरण
- प्रकृति
- प्रबंधन
- प्रेरक कथा
- प्रेरक कहानी
- प्रेरक प्रसंग
- फिल्म संसार
- फिल्मी गीत
- फीचर
- बच्चों का कोना
- बाल कहानी
- बाल कविता
- बाल कविताएँ
- बाल कहानी
- बालकविता
- भाषा की बात
- मानवता
- यात्रा वृतांत
- यात्रा संस्मरण
- रेडियो रूपक
- लघु कथा
- लघुकथा
- ललित निबंध
- लेख
- लोक कथा
- विज्ञान
- व्यंग्य
- व्यक्तित्व
- शब्द-यात्रा'
- श्रद्धांजलि
- संस्कृति
- सफलता का मार्ग
- साक्षात्कार
- सामयिक मुस्कान
- सिनेमा
- सियासत
- स्वास्थ्य
- हमारी भाषा
- हास्य व्यंग्य
- हिंदी दिवस विशेष
- हिंदी विशेष
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें