मंगलवार, 22 मार्च 2016

तकसीम - गुलज़ार

हिंदी सिनेमा जगत के जाने-माने गीतकार गुलज़ार की यह कहानी सच्चाई के धरातल पर खड़ी अनुभव की लेखनी से सजी शब्दों की एक ऐसी इमारत है, जिसमें प्रवेश करती ही आँखें भीग जाती हैं और अंतिम भाग तक आते-आते ये भीगी आँखें बरस पड़ती है। आप भी कुछ फुरसत के पल निकालकर पलकों की कोर पर ये भीगापन महसूस कीजिए...

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