शुक्रवार, 18 मार्च 2016

कन्हैया का खेलकूद - नज़ीर अकबराबादी

तारीफ़ करूँ अब मैं क्या-क्या उस मुरली अधर बजैया की, नित सेवा कुंज फिरैया की और वन वन गऊ चरैया की... नज़ीर ने भगवान कृष्ण को भी अपनी रचनाओं में शामिल करते हुए भावों की सुंदर अभिव्यक्ति दी है, जो देखते ही बनती है। आप भी इस सुंदर रचना का श्रवणपान कर अभिभूत हो जाइए...

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