शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

.........एक गुजारिश शिवराज से

डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता
सुनो माननीय शिवराज, इस आम आदमी की आवाज।
बनाओ ना इस मध्यप्रदेश को भारत के सर का ताज।।

तुमसे हमें बस इतना ही कहना है।
इस आम आदमी को खुशहाल मध्यप्रदेश में रहना है।।

सुना है...
कल रात एक माँ ने अपने बच्चे को भूखा सुलाया था।
एक पति ने अपनी पत्नी को पीट-पीटकर जलाया था।।

सुना है...
कल उस मूँछ वाले घूसखोर ने खूब कमाया था।
कल ही उसने अपना एक नया घर बनावाया था।

सुना है...
कल एक युवक कुछ रद्दी बेचकर आया था।
उसमें मार्कशीट थी, ९० प्रतिशत अंक पाया था।।

सुना है...
कल एक पिता ने अपने बेटे की चिता को जलाया ।
सरकारी डॉक्टर ने उसे अपने क्लिनिक बुलाया था।।

सुना है...
आप चाहते हैं कि हर आदमी इस प्रदेश को अपना माने।
पर इन तकलीफों को वह किस तराजू पर तौले।।

सुना है...
आप इन तकलीफों को हमसे दूर करेंगे।
तभी हम इसे अपना मध्यप्रदेश कहेंगे।।
डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता

1 टिप्पणी:

  1. वाह सर,
    वाकई तारीफे काबिल है आपका लेख , लेकिन कौन सुनता है आपकी बात, किसको समय है इन सच्चाई को स्वीकारने की, समय भी हो तो हिम्मत किसकी है की इन हकीकत को स्वीकार सके।

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