सोमवार, 16 नवंबर 2009

....महानायक के चार दशक


महानायक की 40 वर्ष में 40 महत्वपूर्ण हिन्दी सिनेमा जगत में महानायक के रप में मशहूर अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री में 40 वर्ष पूरे कर लिए है और 1969 में प्रदशत फिल्म सात हिंदुस्तानी से शुरू हुआ उनका फिल्मी सफर आज भी जारी है । वर्ष 1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म सात हिंदुस्तानी से अमिताभ बच्चन ने अपने सिने कैरियर का आगाज किया । वर्ष 1971 में अमिताभ बच्चन को ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म आनंद में2सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ काम करने का मौका मिला। जिसमें फिल्म में बाबू मोशाय के छोटे से किरदार के जरिए अमिताभ बच्चन ने दर्शकों का मन मोह लिया । इस फिल्म के लिए वह सर्वश्रोष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए । वर्ष 1973 अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर का अहम वर्ष साबित हुआ । उस वर्ष उनकी अभिमान जैसी संवेदनशील फिल्म प्रदशत हुई. जबकि प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म जंजीर अमिताभ उनकी पहली सुपरहिट फिल्म साबित हुई । वर्ष 1975 में रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी फिल्म शोले हिन्दी सिनेमा जगत के इतिहास की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई । फिल्म दीवार के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित कर दिया कि राजेश खन्ना के बाद फिल्म इंडस्ट्री को नया सुपरस्टार मिल चुका है । फिल्म चुपके चुपके में अमिताभ बच्चन का नया अंदाज दर्शकों को देखने को मिला । इस फिल्म से पहले अमिताभ बच्चन की छवि एंग्री यंग मैन की थी । पहली बार इस फिल्म के जरिए उन्होंने साबित कर दिया कि वह रूपहले पर्दे पर हास्य भूमिका बखूबी निभा सकते है । इस फिल्म में अमिताभ और धर्मेन्द्र के हास्य अभिनय को आज भी सिने प्रेमी नहीं भूल पाए हैं । यूं तो 1976 में प्रदशत फिल्म दो अनजाने अमिताभ बच्चन की कम चचत फिल्मों मे गिनी जाती है लेकिन यह वहीं फिल्म थी. जिसमें अमिताभ और रेखा की सुपरहिट जोड़ी ने एक साथ काम किया था । वर्ष 1976 में अमिताभ बच्चन की एक और सुपरहिट फिल्म अदालत प्रदशत हुई जिसमें उनका डबल रोल दर्शकों को काफी पसंद आया । वर्ष 1976 में ही अमिताभ बच्चन ने फिल्म कभी कभी में रूमानी किरदार निभाकर दर्शकों को अंचभित कर दिया । माना जाता है कि अमिताभ बच्चन ने गीतकार साहिर लुधियानवी की जिंदगी से जुड़े पहलुओं को रूपहले पर्दे पर पेश किया था । अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर में उनकी जोड़ी अभिनेता विनोद खन्ना के साथ काफी पसंद की गई । वर्ष 1976 में प्रदशत फिल्म हेराफेरी वह पहली फिल्म थी, जिसमें उनकी सुपरहिट जोड़ी2ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया । वर्ष 1977 में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म अमर अकबर ऐंथनी प्रदशत हुई । मनमोहन देसाई की फिल्म में अपने दमदार अभिनय से अमिताभ बच्चन वन मैन इंडस्ट्री के रूप में विख्यात हो गए ।
वर्ष 1978 में अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर का एक अहम पड़ाव साबित हुआ । उस वर्ष उनकी डॉन त्रिशूल और मुकद्दर का सिकंदर जैसी सुपरहिट फिल्में प्रदशत हुई । फिल्म डॉन में जहां अमिताभ बच्चन ने नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया. वहीं त्रिशूल और मुकद्दर का सिकंदर जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम कर वह फिल्म इंडस्ट्री के सिकंदर साबित हुए । अमिताभ बच्चन ने अपने सिने कैरियर में कई फिल्मों में पार्श्वगायन से फिल्म इंडस्ट्री को अपना दीवाना बनाया है । फिल्म मिस्टर नटवर लाल पहली फिल्म थी जिसमें उन्होंने अपना पहला फिल्मी गीत मेरे पास आओ मेरे दोस्तो गाया ।
वर्ष 1981 में अमिताभ बच्चन की नसीब लावारिस और नमकहलाल जैसी सुपरहिट फिल्म प्रदशत हुई । फिल्म इंडस्ट्री मेंं फिल्म नसीब मील का पत्थर के रूप में आज भी याद की जाती है । इस फिल्म में पहली बार एक गाने जॉन जॉनी जर्नादन में कई सितारों को एक साथ दिखाया गया । नसीब और लावारिस जैसी फिल्मों में जहां अमिताभ बच्चन ने अपनी एंग्री यंग मैन की छवि बरकरार रखी, वहीं नमकहलाल में उन्होंने हास्य अभिनय से दर्शकों को हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया । उसी वर्ष अमिताभ बच्चन की फिल्म सिलसिला प्रदशत हुई । माना जाता है कि इस फिल्म में अमिताभ और रेखा के जीवन को रूपहले पर्दे पर दर्शाया गया है । सिलसिला, अमिताभ और रेखा की जोड़ी वाली आखिरी फिल्म साबित हुई । अमिताभ बच्चन का ख्वाब था कि वह अपने आदर्श दिलीप कुमार के साथ भी काम करे । वर्ष 1982 में प्रदशत फिल्म शक्ति में उन्हें दिलीप कुमार के साथ काम करने का मौका मिला । पिता और पुत्र के द्वंद्व पर आधारित इस फिल्म में दोनों कलाकारों का टकराव देखने लायक था । वर्ष 1983 में फिल्म अंधाकानून में उन्होंने अतिथि भूमिका की छोटी भूमिका निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया । यूं तो यह फिल्म अभिनेता रजनीकांत पर आधारित थी लेकिन दर्शकों का मानना है यह फिल्म अमिताभ की थी ।
मनमोहन देसाई की फिल्म कुली .1983.अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर के साथ ही व्यक्तिगत जीवन में भी सदा याद रखी जाएगी । इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन को गंभीर चोट लगी थी और वह लगभग मौत के मुंह में चले गए थे। वर्ष 1983 में ही अमिताभ बच्चचन की फिल्म महान प्रदशत हुई । इस फिल्म को टिकट खिड़की पर व्यावसायिक सफलता नहीं मिली, लेकिन अमिताभ ने पहली बार तिहरी भूमिका निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । अमिताभ बच्चन के शुरुआती दौर में निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्मों का अहम योगदान रहा है । वर्ष 1984 में प्रदशत फिल्म शराबी प्रकाश मेहरा के साथ उनकी अंतिम सुपरहिट फिल्म थी । अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर को सजाने संवारने में निर्माता निर्देशक मनमोहन देसाई की फिल्मों का अहम योगदान रहा है । वर्ष 1985 में प्रदशत फिल्म मर्द अस्सी की दशक में अमिताभ बच्चन की कामयाब फिल्मों में एक मानी जाती है । इस फिल्म में अमिताभ बच्चन का बोला गया संवाद मर्द को दर्द नहीं होता सिने दर्शक आज भी नहीं भूल पाए हैं । वर्ष 1986 में प्रदशत सुपरहिट फिल्म आखिरी रास्ता के बाद अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री से कुछ समय तक किनारा कर लिया और राजनीति में चले गए । राजनीति की दुनिया रास नहीं आने के कारण अमिताभ बच्चन एक बार फिर से 1988 में प्रदशत फिल्म शहंशाह के जरिए फिल्म इंडस्ट्री में वापस लौटे । दिलचस्प बात है कि काफी लंबे अरसे से दर्शकों को उनकी वापसी का इंतजार था और उनकी मांग को देखते हुए मुंबई के सिनेमाहॉल में इसे प्रदर्शन के एक दिन पहले रिलीज करना पड़ा । फिल्म इंडस्ट्री में अपने दमदार अभिनय से अमिताभ बच्चन ने यह बता दिया कि फिल्म जगत के शहंशाह वही हैं । वर्ष 1990 में अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ प्रदशत हुई । मुकुल एस.आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म हांलाकि बाक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन अमिताभ बच्चन सर्वश्रोष्ठ अमिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किए गए । वर्ष 1992 में बढ़ती उम्र और तकाजे को देखते हुए अमिताभ बच्चन ने फिल्म खुदागवाह के प्रदर्शन के बाद इंडस्ट्री से किनारा कर लिया । लगभग पांच वर्षो तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहने के बाद उन्होंने अपनी होम प्रोडक्शन ए.बी.सी.एल में बनी फिल्म मृत्युदाता के जरिए कम बैक करने का प्रयास किया लेकिन दुर्भाग्य से फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई ।
फिल्म इंडस्ट्री में दुबारा कदम रखने के बाद 1998 में उनकी फिल्म बड़े मियां छोटे मियां प्रदशत हुई । डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने अपने हास्य अभिनय से दर्शकों को दीवाना बना दिया । वर्ष 2000 में प्रदशत फिल्म मोहब्बतें के जरिए अमिताभ बच्चन की यश चोपड़ा कैंप में दमदार वापसी की और अपने अभिनय से दर्शकों को रोमांचित कर दिया । वर्ष 2001 में प्रदशत फिल्म अक्स के जरिए अमिताभ बच्चन के अभिनय का नया अंदाज दर्शकों के सामने आया । फिल्म में उन्होंने नेगेटिव किरदार के जरिए दर्शकों को कहने पर मजबूर कर दिया बंदा ए बिंदास है वर्ष 2003 में उनकी एक और महत्वपूर्ण फिल्म बागबान प्रदशत हुई । पारिवारिक पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में अमिताभ और हेमा मालिनी की जोड़ी को जमकर सराहा गया । वर्ष 2005 में अमिताभ बच्चन ने ब्लैक और सरकार जैसी सफल फिल्मों में जबरदस्त अभिनय से यह बता दिया कि फिल्म इंडस्ट्री के असली सरकार वही है । इसके साथ ही फिल्म ब्लैक में दमदार अभिनय के लिए वह सर्वश्रोष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए । उसी वर्ष अमिताभ ने अपने उम्र से काफी कम कम की नायिका के साथ फिल्म निशब्द में काम कर दर्शकों को निशब्द कर दिया ।
अमिताभ बच्चन का सपना था कि वह फिल्म शोले के किरदार गब्बर सिंह को रूपहले पर्दे पर अदा करें। वर्ष 2008 में प्रदशत फिल्म राम गोपाल वर्मा की आग में उन्हें गब्बर सिंह से मिलते जुलते किरदार को निभाने का अवसर मिला लेकिन दुर्भाग्य से फिल्म टिकट खिड़की पर असफल साबित हुई । वर्ष 2009 में अमिताभ बच्चन के सिने कैरियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म पा प्रदशत होने जा रही है । दिलचस्प बात है कि अपने उम्र के 67 बसंत पार कर चुके अमिताभ बच्चन फिल्म में बारह साल के बच्चो का किरदार निभाने जा रहे हैं । इस फिल्म में पह प्रोजेरिया से ग्रस्त एक ऐसे लड़के की भूमिका निभा रहे है -.जो बचपन के दिनों में ही बूढ़ा दिखाई देने लगता है ।
प्रेम कुमार

2 टिप्‍पणियां:

  1. संक्षिप्त में सुन्दर वर्णन

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  2. इसमे कोई शक नही कि अमिताभ एक बहुत अच्छे अभिनेता है और उन्होने बहुआयामी किर्दारों को निभाया है । अपनी पीढ़ी के अन्य अभिनेताओं की तरह वे चुके नही बल्कि नित नये क्षितिज तलाशते रहे । इसलिये उनके बारे मे कुछ भी लिखा जाये पढ़ना अच्छा लगता है । इस लेख मे आपने उनके जीवन के विशिष्ट पहलुओं को उभारा है । धन्यवाद ।

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