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6:03 pm
नज़ीर अकबराबादी मृत्यु के करीब 300 वर्ष बाद भी प्रासंगिक हैं। उनकी कविताओं में ताज़गी देखते ही बनती है। साधारण से साधारण विषय पर भी वो गंभीरता से अपनी बात रखते हैं। हबीब तनवीर का नाटक 'आगरा बाज़ार' उन्हीं के गीतों से सजा और सॅंवरा है। यहॉं प्रस्तुत है उनकी एक प्रसिद्ध रचना - जब लाद चलेगा बंजारा...

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