शुक्रवार, 25 नवंबर 2016
कविताएँ - 2 - सरिता शर्मा
कुछ पलों के लिए... कविता का अंश...
कुछ पलों के लिए, आओ मिल जाएँ हम,
खुशबुओं की तरह, बादलों की तरह।
भूल जाएँ चलो मान अभिमान को,
सूफियों की तरह, पागलों
की तरह!
चल पड़ें आज कोलाहलों से परे,
रिक्त कर लें हृदय हलचलों से भरे,
धड़कनों में बुनें राग अनुराग का,
नृत्य करती हुई पायलों
की तरह!
वर्जना के जगत में सहज भूल सा,
प्यार खिलता रहा जंगली फूल सा,
धमनियों में घुला चाहतों का ज़हर,
हम महकने लगे संदलों
की तरह!
ऐसी ही अन्य कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...
संपर्क ईमेल- geetsarita@yahoo.co.in
लेबल:
कविता,
दिव्य दृष्टि

सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Post Labels
- अतीत के झरोखे से
- अपनी खबर
- अभिमत
- आज का सच
- आलेख
- उपलब्धि
- कथा
- कविता
- कहानी
- गजल
- ग़ज़ल
- गीत
- चिंतन
- जिंदगी
- तिलक हॊली मनाएँ
- दिव्य दृष्टि
- दिव्य दृष्टि - कविता
- दिव्य दृष्टि - बाल रामकथा
- दीप पर्व
- दृष्टिकोण
- दोहे
- नाटक
- निबंध
- पर्यावरण
- प्रकृति
- प्रबंधन
- प्रेरक कथा
- प्रेरक कहानी
- प्रेरक प्रसंग
- फिल्म संसार
- फिल्मी गीत
- फीचर
- बच्चों का कोना
- बाल कहानी
- बाल कविता
- बाल कविताएँ
- बाल कहानी
- बालकविता
- भाषा की बात
- मानवता
- यात्रा वृतांत
- यात्रा संस्मरण
- रेडियो रूपक
- लघु कथा
- लघुकथा
- ललित निबंध
- लेख
- लोक कथा
- विज्ञान
- व्यंग्य
- व्यक्तित्व
- शब्द-यात्रा'
- श्रद्धांजलि
- संस्कृति
- सफलता का मार्ग
- साक्षात्कार
- सामयिक मुस्कान
- सिनेमा
- सियासत
- स्वास्थ्य
- हमारी भाषा
- हास्य व्यंग्य
- हिंदी दिवस विशेष
- हिंदी विशेष
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें