अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

2:12 pm
कविता का अंश... मैं भेजूंगा उसकी ओर, प्रार्थना की तरह शुभेच्छाएँ, किसी प्राचीन स्मृति की प्राचीर से, पुकारूंगा उसे। जिसकी हमें अब कोई ख़बर नहीं, अपनी अखण्ड पीड़ा से चुनकर, कुछ शब्द और कविताएँ, बहा दूंगा, वर्षा की भीगती हवाओं में। जिसे अजाने देश की किसी अलक्ष्य खिड़की पर बैठा, कोई प्रेमी पक्षी गाएगा, मैं सहेज कर रखूंगा उन क्षणों को, जब आखि़री बार, अपनी समूची अस्ति से उसने छुआ था मुझे। और धूप के सरोद पर गुनगुना उठा था, हमारा प्रेम। बार-बार भूलने की कोशिश में, कुछ और अधिक याद करूंगा उसे। छुपाते-छुपाते छलक ही आएंगे आँसू, हर बार दूर जाते-जाते लौट आऊंगा वहीं, जहाँ उसके होने का अहसास, अकस्मात विलीन हो गया था, किसी अधूरे सपने की तरह। मैं हमेशा की तरह, उसके लिए लेकर आऊंगा, एक कप चाय और थोड़े-से बिस्कुट। और प्रतीक्षा करूंगा उन चिट्ठियों की, जो नहीं आएंगी कभी!! ऐसी ही कुछ कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.