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फॉसिल' और पुराने खंडहर... लेख के बारे में... राने रेंगनेवाले जानवरों की हड्डियों को खास तौर से याद रखना। सांप, छिपकली, मगर और कछुवे वगैरह जो आज भी मौजूद हैं, रेंगनेवाले जानवर हैं। पुराने जमाने के रेंगनेवाले जानवर भी इसी जाति के थे पर कद में बहुत बड़े थे और उनकी शक्ल में भी फर्क था। तुम्हें उन देव के-से जंतुओं की याद होगी जिन्हें हमने साउथ केन्सिगटन के अजायबघर में देखा था। उनमें से एक तीस या चालीस फुट लंबा था। एक किस्म का मेढक भी था जो आदमी से बड़ा था और एक कछुवा भी उतना ही बड़ा था। उस जमाने में बड़े भारी-भारी चमगादड़ उड़ा करते थे और एक जानवर जिसे इगुआनोडान कहते हैं, खड़ा होने पर वह एक छोटे-से पेड़ के बराबर होता था। तुमने खान से निकले हुए पौधे भी पत्थर की सूरत में देखे थे। चट्टानों में 'फर्न' और पत्तियों और ताड़ों के खूबसूरत निशान थे। रेंगनेवाले जानवरों के पैदा होने के बहुत दिन बाद वे जानवर पैदा हुए जो अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं। ज्यादातर जानवर जिन्हें हम देखते हैं, और हम लोग भी, इसी जाति में हैं। पुराने जमाने के दूध पिलानेवाले जानवर हमारे आजकल के बाज जानवरों से बहुत मिलते थे उनका कद अक्सर बहुत बड़ा होता था लेकिन रेंगनेवाले जानवरों के बराबर नहीं। बड़े-बड़े दाँतोंवाले हाथी और बड़े डील-डौल के भालू भी होते थे। तुमने आदमी की हड्डियाँ भी देखी थीं। इन हड्डियों और खोपड़ियों के देखने में भला क्या मजा आता। इससे ज्यादा दिलचस्प वे चकमक के औजार थे जिन्हें शुरू जमाने के लोग काम में लाते थे। आगे की जानकारी ऑडियो के माध्यम से प्राप्त कीजिए...

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