सोमवार, 3 अक्तूबर 2016

कुछ कविताएँ – 1 – शैलजा दुबे

कविता का अंश… स्वच्छ, निर्मल, श्वेत धारा, स्निग्ध, शांत, क्लांत धारा..... असंख्य बाधाओं को करके पार, समंदर में मिलने को अधीर धारा...... बचपन में माता पिता घर पली, संग सखियों के की अठखेली, डोली में बैठ पिया घर चली, समुंदर में मिलने को अधीर धारा...... देखे हैं जीवन के अनेक रूप, शीतल छाँव, तपती धूप, फिर भी नहीं लेती विश्राम, बहती रहती निरंतर, अविरल, अविराम, समंदर में मिलने को अधीर धारा.... स्वच्छ, निर्मल, श्वेत धारा… ऐसी ही अन्य कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए…

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