अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

11:35 am
कविता का अंश… नींद बड़ी अच्छी लगती है, मीठी गोली जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, माँ की बोली जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, अपने खेलों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, सुंदर मेलों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, खिल खिल फूलों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, प्यारे झूलों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, झिलमिल किरनों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, चंचल हिरनों जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, अपनी नानी जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है, कथा कहानी जैसी। नींद बड़ी अच्छी लगती है…. इस अधूरी कविता को पूरा सुनने का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए…

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.