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11:42 am
कहानी का अंश… एक बार युद्ध चल रहा था। कई सिपाही घायल हो गए थे। इसी दौरान एक सिपाही युद्ध क्षेत्र में अपने घायल साथी सिपाही के पास पहुँचने को उतावला हो रहा था। यह देख कप्तान बोला – जाने से पहले सोच लो, वहाँ जाना अपनी जान भी जोखिम में डालने जैसा है। वैसे भी जब तक तुम अपने साथी के पास पहुँचोगे, हो सकता है, तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी हो। इसके बावजूद सिपाही युद्ध क्षेत्र में गया और अपने साथी को वापस ले आया। साथी का शव सिपाही के कंधे पर देख कर कप्तान बोला, मैंने कहा था कि वहाँ जाना व्यर्थ ही होगा, देखो वह जीवित नहीं है। सिपाही की आँखों में आँसू थे। वह बोला – सर, मेरा वहाँ जाना सार्थक रहा, क्योंकि जब मैं वहाँ पहुँचा, तो मेरे मित्र की साँसे चल रही थी। मुझे देखकर उसके चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और उसके आखरी शब्द थे – मैं जानता था मित्र कि तुम जरूर आओगे। यह होता है, मित्रता का भरोसा। ऐसी ही अन्य प्रेरक कहानियाँ ऑडियो की मदद से सुनिए….

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