शुक्रवार, 13 मई 2016

लघुकथाएँँ - जीवन दर्शन - 3

जीवन रूपी सिक्‍के के भी दो पहलू है - दुख और सुख, हार और जीत, हँँसना और रोना, ज्ञान और अज्ञान। ईश्‍वर ने सारी चीजें दो का मेल करते हुए बनाई है, ताक‍ि इंसान किसी एक में डूब न जाए। दो का यह जोड़़ जीवन को गति देता है। जीवन संघर्ष को सफलता की ओर ले जाता है। इस जीवन में वही सुखी है, जो इन दोोनों को समान रूप से स्‍वीकार करता है। मानव जीवन दर्शन इसी का सारांश है। हमारे दुख का कारण यही है कि हम इस संसार में हँँसने के तो हजारों कारण खोजते हैं पर रोने का एक ही कारण हमारे लिए बहुत होता है। किसी के दुख में दुखी होना हमें आता हो या न आता हो, परंतु किसी के सुख में सुखी होना तो हमें आता ही नहीं है। हम वहाँँ ईर्ष्‍या, दाह, जलन जैसे भावों से लिप्‍त हो जाते हैं और यही हमारे दुख का वास्‍तविक कारण बन जाता है। कुछ लघुकथाओं के माध्‍यम से जीवन की इसी सच्‍चाई को समझाने का प्रयास किया गया है। तो ऑडियो के माध्‍यम से इन कथाओं का आनंद लीजिए और जीवन में सफलता प्राप्‍त कीजिए...

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