रविवार, 15 मई 2016

लघुकथाएँँ - जीवन दर्शन - 4

जीवन छोटी-छोटी खुशियों का नाम है। दुख है, तभी सुख है। यद‍ि जीवन में यह दोनों ही नहीं है, तो जीने का मजा भी नहीं है। हमें खुशी का अहसास गम के आने के बाद ही होता है और गम का अहसास खुशी के जाने के बाद ही होता है। जीवन के हर क्षण काेे इस तरह जीएँँ कि वो एक प्रेरणा बन जाए। हमारे लिए भी और दूसरों के लिए भी। यही जीवन दर्शन का सिद़धांत है। जो इसके अनुसार जीवन जीता है, वह जीवन का भरपूर मजा लेता है और सफलताओं को अपने करीब पाता है। जीवन की सच्‍ची सफलता खुशियों में छिपी हुई है, हमारे भीतर की मुस्‍कान में छिपी हुई है। खुलकर जीने के लिए खुलकर हँँसना-हँँसाना दोनों जरूरी है। कुछ इसी तरह की बात इन लघुकथाओं में भी गंभीरतापूर्वक समझाई गई है। जिसका आनंद लीजिए, इस ऑडियो के माध्‍यम से...

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Labels