सोमवार, 9 मई 2016

एन. रघुरामन - जीने की कला - 3

लेख का अंश... वह जानता था कि कल्‍पनाशीलता की कोई कमी नहीं है, वह यह भी जानता था कि उसे दर्जनभर अवधारणाओं पर काम करना होगा। उनमें से कुछ दूर की कौड़ी लग सकते हैं, लेकिन आखिरकार उसमें व्‍यवहारिक रूप से अपनाने की गुंजाइश भी होगी और मौजूदा वक्‍त के लिए प्रासंगिकता भी। ठीक यही उसके साथ हुआ। वह और उसके दो साथी अब एक स्‍टार्टअप के भागीदार हैं। कौन हैं ये तीन, जिन्‍होंने ऑटोमोबाइल की दुनिया में नए प्रयोग कर एक नई तकनिकी से दुनिया की पहचान करवाई है और अपना नाम भी लोगों के बीच पाया है। दृढ़ विश्‍वास, विचार और कर्म से सफलता का शिखर छूने वाले इन मेहनती लोगों के बारे में जानिए, जीने की कला के और इस ऑडियो के माध्‍यम से...

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