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कहानी के बारे मे... दिव्‍यदृष्टि के श्रव्‍यसंसार में हम लेकर आए हैं, गुजराती लेखक प्रशांत दयाल की पुस्‍तक 'जीवती वारता' में से एक गुजराती कहानी। प्रेम की कोई भाषा नहीं होती लेकिन बिना भाषा के ही यह बहुत कुछ कह जाता है। एक नए संसार में ले जाता है। जिस संसार में सारी कमियों को नजर अंदाज कर दिया जाता है। त्‍याग, समर्पण और आपसी समझबूझ से एक ऐसा रंगीन संसार बसता है कि उसमें कोई कमी नहीं रहती। पर यदि इसी संसार को नजर लग जाए तो जीवन कैसे जिया जाए! फिर भी मृत्‍यु के पहले का जीवन तो जीना ही होता है। मरने से पहले मरा नहीं जाता और एक जोश-जुनून सांसों में भरकर जीवन का हर पल जीना होता है। पुरानी यादों के सहारे ही सही लेकिन एक मकसद के साथ। एक नई रोशनी के साथ जो हमारे अतीत से जुड़ी होती है। जो हमें पल-पल जीने की प्रेरणा देती है। कुछ इसी तरह की जज्‍बाती दास्‍तां बयां करती है यह प्रेम कहानी... यद‍ि आप भी गुजराती भाषा की समझ रखते हैं, तो इस कहानी का एक बार आनंद जरूर लीजिए...

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