सोमवार, 22 अगस्त 2016

बाल कविता – बादल आए…

कविता का अंश… बादल आए, बादल आए साथ में अपने पानी लाए। चिंटू, मिंटू, बिट्टू झूमे, झम-झम, झम-झम ये बादल झूमते आए। चिंकी, मिंकी, पिंकी नाचे, झर-झर, झर-झर ये झरते जाए। ठंडी-ठंडी हवा भी साथ लाए, मन भीगा-भीगा बहता जाए। खुशियों का संदेशा साथ लाए, हम तुम, तुम हम गाते जाएँ। बादल भूरे, काले हैं, खूब बरसने वाले हैं। शहरों और पहाड़ों पर, सारे जंगल झाड़ों पर। छमक-छमक बरसातें होंगी, हरियाली की बातें होंगी। भूल जाओं कि रोज चाँद-सितारों की रातें होंगी। घटाएँ घनघोर होंगी, दुबके-सहमे हम होंगे और मेंढकों की टर्र-टर्र होंगी। लेकिन हमें बताओं तो, थोड़ा यह समझाओ तो, बादल आते कैसे हैँ? नील गगन में छाते कैसे हैं? संग अपने पानी लाते कैसे हैं? इस अधूरी कविता को पूरा सुनने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए…

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

Post Labels