गुरुवार, 4 अगस्त 2016

बाल कहानी - नन्हीं तितली - डॉ. सुनयना पांडे

कहानी का अंश…. आज पहली बार सभी बच्चे फूलों का रस पीने के लिए तैयार हो रहे थे। अब तक तितली माँ ही उनके लिए फूलों का रस लेकर आती थी। अब उनके पंख बाहर की तेज हवा में उड़ने लायक तैयार हो गए थे। उनहें बाहर की दुनिया में जाकर फूलों का रस किस तरह से पीना है, इसके बारे में अच्छी तरह से समझा दिया गया था। बच्चे बगीचे में जाने के लिए उतावले हो रहे थे। वे जल्दी से जल्दी अपने सुंदर सलोने पंखों को बाहर की दुनिया में फैलाना चाह रहे थे। उनका ये उतावलापन देखकर तितली माँ और पिता को अपने दिन याद आ गए। ‘‘सुनो बच्चो, एक बार फिर से याद दिला दूँ कि किसी भी फूल पर ज्यादा देर तक मत बैठना। रस पीने में इतना मगन मत हो जाना कि पास आते खतरे के बारे में तुम्हें पता भी न चले। याद रहे, हमें सबसे ज्यादा खतरा दो तरह के जीवों से होता है। एक तो हमारी तरह ही परों से उड़नेवाली हरियल चिड़िया जो अपनी लम्बी-पतली चोंच से पलक झपकते ही हम तितलियों को अपना शिकार बना लेती है। मुझे अच्छी तरह से याद है, जब मेरी आँखों के सामने ही मेरे बड़े भाई को उस चालाक चिड़िया ने एक पल में ही अपना भोजन बना लिया था। बेचारा… ’’ यह कहते हुए तितली पिता का गला भर आया। बात को आगे बढ़ाते हुए तितली माँ बोली - और दूसरा खतरा है, दो पैरों वाले जीव से। जिसे सभी इंसान के नाम से जानते हैं। वे हमारी सुंदरता के कारण हमें पकड़कर काँच के जार में बंद कर देते हैं। उनकी कठोर उँगलियों से हमारे कोमल पंख घायल हो जाते हैं और फिर हमें उड़ने में भी परेशानी होती है। अत: उनसे सावधान रहना। तितली माँ और पिता की बात बच्चो ने मानी या नहीं? उन्हें क्या किसी मुसीबत का सामना करना पड़ा? आगे क्या हुआ? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए…

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