शुक्रवार, 22 जुलाई 2016
गायक - मुकेश - 22 जुलाई जन्मतिथि पर विशेष आलेख…
किसे याद रखूँ किसे भूल जाऊँ : मुकेश - प्रकाश जैन
लेख का अंश… तलत मेहमूद की आवाज में फिल्म पतिता का गीत है - हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें हम दर्द के सुर में गाते हैं। मुकेश के गीत भी हमें इसलिए मधुर लगते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी आवाज में सारा दर्द उड़ेलकर उन्हें गाया है। दर्द भरे गीतों की जब बात चलती है, तो सहगल के बाद मुकेश और तलत मेहमूद की याद आती है। मुकेश ने ऐसे सैंकड़ों गीत गाए हैं, जिन्हें सुनकर आँसू भले ही न आए, पर दिल जरूर भर आता है। ऐसे कई गीत हैं, जो सिर्फ मुकेश ही गा सकते थे या यूँ कह लें कि सिर्फ मुकेश के लिए ही रचे गए थे। मुकेश की आवाज में इतना दर्द कहाँ से आया? इसकी वजह यह थी कि वे बड़े संजीदा इंसान थे। गरीबों के रहनुमा थे। दूसरों के दुख-दर्द को समझते थे। विरही गीतों में एक विरही व्यक्ति के मन की पीड़ा को वे बखूबी व्यक्त कर देते थे। मानों वो पीड़ा स्वयं उन्होंने ही भोगी हो। ठंड के दिनों में अपने कार की पिछली सीटों पर ढेर सारे कंबल लेकर घर से निकल जाते और फुटपाथ पर नंगे बदन ठिठुरनेवाला जो भी व्यक्ति दिखता, उन्हें वह कंबल ओढ़ा देते। एक बार उनके फ्लेट के पीछे की तरफ चालवाले उनके पास आए और कहा - दादा, हमें आपका गाना सुनना है। उन्होंने उन सभी को रविवार के दिन अपने घर पर बुलाया और जी भरकर गीत सुनाए। साथ ही साजिंदों की भी व्यवस्था की थी। उन सभी के बीच रहकर उन्हें अपार खुशी मिलती थी। मुकेश के अवसान पर राजकपूर ने कहा था - मेरी तो आवाज ही चली गई। वे मेरी आवाज थे। मेरी फिल्मों की लय थे। हम दोनों के बीच एक आंतरिक रिश्ता कायम हो गया था। जिस पर कभी पेशा हावी नहीं हुआ। वह और मैं एक थे, अभिन्न थे, अद्वैत का रूप थे।
फिल्म गायक मुकेश से जुड़ी ऐसी ही अन्य बातें ऑडियो के माध्यम से जानिए…
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