मंगलवार, 19 जुलाई 2016

बाल कविताएँ - रमेश तैलंग

कविता का अंश...हरी घास का, बिछा गलीचा । सुन्दर-सुन्दर सजा बग़ीचा । ठंडी-ठंडी हवा चल रही, फूलों पर तितली मचल रही, यहाँ बैठकर, मन बहलाओ । जैसे पंछी, गाते, गाओ । ऐसी ही अन्य चुलबुली कविताओं का आनंद ऑडियो की मदद से लीजिए...

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