बुधवार, 6 जुलाई 2016
गीजूभाई की कहानियाँ - 9 - चिड़िया चिरौटा
चिड़िया चिरौटा... कहानी का अंश...
एक थी चिड़िया और एक था चिरौटा। चिड़िया लाई चावल, चिरौटा लाया दाल। चिड़िया ने खिचड़ी बनाई। चूल्हे पर खिचड़ी रखकर चिड़िया पानी भरने गई। चिरौटे से कहती गई, "जरा खिचड़ी देखते रहना। कहीं जल न जाए।"
जब चिड़िया चली गई, तो चिरौटे ने कच्ची-पक्की खिचड़ी खा डाली। चिड़िया को पता न चल सके, इसलिए वह आँखों पर पट्टी बाँधकर सो गया। इसी बीच चिड़िया पानी भरकर वापस लौटी। चिरौटे ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर लिया था। चिड़िया बोली, "चिरोटेजी दरवाज़ा खोलो।" चिरौटे ने कहा, "मेरी आँखें दुख रही हैं। मैं तो आँखों पर पट्टी बाँधकर लेट गया हूँ। तुम हाथ डालकर दरवाजा खोल लो।"
चिड़िया ने कहा, "लेकिन पानी से भरी इन मटकियों को कौन उतारेगा?"
चिरौटा बोला, "ऊपर वाली मटकी फोड़ डालो और नीचे वाली मटकी लेकर घर के अन्दर आ जाओ।"
चिड़िया ने ऊपर वाली मटकी फोड़ डाली और नीचे वाली मटकी उतार-कर घर में गयी। जब रसोईघर मे जाकर उसने खिचड़ी सँभाली, तो देखा कि पतीली में खिचड़ी है ही नहीं।
चिड़िया ने पूछा, "चिरौटेजी! खिचड़ी कौन खा गया?"
चिरौटे ने कहा, "मुझे क्या पता कि कौन खा गया। राजा का कुत्ता आया था। शायद वह खा गया हो।"
चिड़िया राजा के पास शिकायत करने पहुँची। उसने राजा से कहा, "राजाजी, राजाजी! आपका कुत्ता मेरी खिचड़ी खा गया है।"
राजा बोला, "काले कुत्ते को हाजिर करो। वह चिड़िया की खिचड़ी क्यों खा गया?"
कुत्ता आया। उसने कहा, "मैंने चिड़िया की खिचड़ी नहीं खाई है। चिरौटे ने खाई होगी। वह झूठ बोल रहा होगा।",
राजा बोला, "चिरौटे को हाजिर करो।" क्या चिरौटा वहाँ हाजिर हुआ? और फिर क्या उसका झूठ पकड़ा गया? आगे क्या हुआ, यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...
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