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कहानी का अंश… उमंग वन में सब शांति और प्रेम से रहते थे। सभी जानवरों में भाई-चारा था। वे आपस में हिलमिल कर रहते। सुख-दुख में एक-दूसरे के काम आते। यह सब महाराज सिंहराज की वजह से था। वे बहुत भले और शांतिप्रिय राजा थे। उमंग वन में रहने के कुछ नियम उन्होंने बनाए थे। उन नियमों का पालन करना सभी के लिए बहुत जरूरी था। वहाँ किसी शिकारी द्वारा शिकार करने पर पाबंदी थी। इसके लिए वन में चारों तरफ हरियल तोते तैनात किए हुए थे। उनके साथ में होते थे - मंकी बटालियन के बंदर। जब भी कोई शिकारी वन में घुसता, हरियल तोते उनका स्वागत करते और कहते - नमस्ते, उमंग वन में आपका स्वागत है। आप हमारे वन में बिना किसी डर के घूम सकते हैं। कोई भी जानवर आप पर हमला नहीं करेगा। हम आशा करते हैं कि आप भी किसी जानवर को तंग नहीं करेंगे। न ही उसका शिकार करेंगे। इसके बाद मंकी बटालियन के बंदर चुपचाप उन पर नजर रखते। वह जहाँ भी जाता, उसका पीछा करते। यदि वह शिकार करने की कोशिश करता, तो बंदर जोर से हुँकार भरते। इससे सब जान जाते कि आया हुआ शिकारी किसी जानवर का शिकार करना चाह रहा है। शिकार होनेवाला जानवर भी सावधान हो जाता और जान बचाकर भाग खड़ा होता। अन्य जानवर भी उसकी सहायता के लिए पहुँच जाते। इसके बाद वे मिलकर वन में शिकारी पर हमला बोल देते। इस तरह वन में शिकारियों से सुरक्षा के लिए पक्का इंतजाम किया हुआ था। वहाँ खतरू नाम का एक खूँखार भेडिया रहता था। वह इन नियमों का पालन नहीं करता था और आए दिन छोटे-छोटे जानवरों को तंग किया करता था। आगे क्या हुआ? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए…

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