अतीत के झरोखे से अपनी खबर अभिमत आज का सच आलेख उपलब्धि कथा कविता कहानी गजल ग़ज़ल गीत चिंतन जिंदगी तिलक हॊली मनाएँ दिव्य दृष्टि दीप पर्व दृष्टिकोण दोहे नाटक निबंध पर्यावरण प्रकृति प्रबंधन प्रेरक कथा प्रेरक कहानी प्रेरक प्रसंग फिल्‍म संसार फिल्‍मी गीत फीचर बच्चों का कोना बाल कहानी बाल कविता बाल कविताएँ बाल कहानी बालकविता मानवता यात्रा वृतांत यात्रा संस्मरण लघु कथा लघुकथा ललित निबंध लेख लोक कथा विज्ञान व्यंग्य व्‍यक्तित्‍व शब्द-यात्रा' श्रद्धांजलि सफलता का मार्ग साक्षात्कार सामयिक मुस्‍कान सिनेमा सियासत स्वास्थ्य हमारी भाषा हास्‍य व्‍यंग्‍य हिंदी दिवस विशेष हिंदी विशेष

5:04 pm
कहानी का अंश... रामपुर गाँव में एक बूढ़े काका रहते थे। उन्होंने अपने खेत में गाजर बोया। काका रोज सुबह-शाम गाजर को पानी पिलाते और यूं गाते- गाजर-गाजर बड़ा हो बड़ा हो और मीठा हो, गाजर-गाजर बड़ा हो। कुछ समय में ही गीत और पानी नें अपना कमाल दिखाया और छोटा सा गाजर खूब बड़ा हो गया। अब काका को लगा कि इसे निकाला जा सकता है। एक दिन सुबह-सुबह काका खेत में आए और गाजर को खींचकर निकालने का प्रयास किया। मगर यह क्या? एक हाथ से गाजर को निकाल न पाए, तो उन्होंने दूसरे हाथ की मदद ली। दोनों हाथों से पूरा जोर लगाकर खींचा, किंतु गाजर मिट्टी से बाहर न आया। आखिर काका ने काकी को आवाज लगाई- गाजर खींचने में मेरी मदद करो। मैं गाजर को पकडूँ और तुम मुझे पकड़ो। काकी ने काका की बात मानते हुए खेत की ओर कदम बढ़ाया। काकी, काका को खींचे, और काका गाजर को खींचे। काका-काकी दोनों ने मिलकर जोर लगाया, पर गाजर को न खींच पाए। थककर काकी ने अपनी बिटिया को आवाज लगाई- ओ मेरी लंबी चोटीवाली बिटिया यहाँ आओ। गाजर खींचने में हमारी मदद करो। आवाज सुनकर बिटिया दौड़ी आई-लंबी चोटीवाली बिटिया काकी को खींचे, काकी, काका को खींचे, और काका गाजर को खींचे। तीनों ने मिलकर खूब ताकत लगाई, पर गाजर को निकाल नहीं पाए। फिर लंबी चोटीवाली बिटिया ने अपने कुत्ते को आवाज लगाई- ओ कालिया, यहाँ आ। गाजर खींचने में हमारी मदद कर। पूँछ हिलाता कालिया आया- कालिया, बेटी की लंबी चोटी खींचे, बेटी, काकी को खींचे, काकी, काका को खींचे, और काका गाजर को खींचे। पहले तो तीन थे। अब तो चार हो गए। चारों ने मिलकर खूब ताकत लगाई, पर गाजर को बाहर न निकाल पाए। कालिया तो परेशान हो गया। आखिर उसने आवाज लगाई- पूसी, ओ पूसी यहाँ आओ और हमारी गाजर खींचने में मदद करो। कालिया की आवाज सुनकर पूसी बिल्ली दौड़ती चली आई, अब- पूसी, कालिया की काली पूँछ खींचे कालिया, बेटी की लंबी चोटी खींचे, बेटी, काकी को खींचे, काकी, काका को खींचे, और काका गाजर को खींचे। आखिरकार इस तरह से गाजर मिली या नहीं? यह जानने के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...

एक टिप्पणी भेजें

Author Name

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.