मंगलवार, 20 सितंबर 2016
अकबर-बीरबल की कहानी – 17
चोरी का पता.... कहानी का अंश...एक बार शहर के किसी मशहूर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गई। उनका बहुत-सा धन चोरी चला गया। व्यापारी ने इसकी शिकायत काजी से की। जाँच-पड़ताल शुरू हुई लेकिन चोर पकड़ा न जा सका। बात बादशाह तक पहुँची और उन्होंने बीरबल से चोर को पकड़कर माल बरामद करने का हुक्म दिया। बीरबल ने उस व्यापारी को बुलवाया और उससे पूछा – क्या तुम्हें किसी पर संदेह है? यदि हो तो साफ-साफ बता दो। देखो, घबराओ नहीं। तुम्हें सारा धन वापस मिल जाएगा। व्यापारी ने उत्तर दिया – हुजूर, मेरा यह अंदाजा है कि चोरी मेरे नौकरों में से ही किसी ने की होगी क्योंकि बाहर का आदमी तो घर की इतनी जानकारी नहीं रख सकता। लेकिन मैंने किसी को चोरी करते हुए देखा नहीं है, इसलिए मैं किसी के बारे में दावे के साथ नहीं कह सकता कि फलाँ शख्स ने चोरी की है। बीरबल ने सिपाही को भेजकर उस व्यापारी के घर से नौकरों को दरबार में बुलवाया। नौकरों के आने के बाद बीरबल ने असली चोर का पता कैसे लगाया होगा? क्या व्यापारी का सारा धन वापस मिल गया होगा? क्या नौकरों ने ही चोरी की होगी? इन जिज्ञासाओं के समाधान के लिए ऑडियो की मदद लीजिए...
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